Kumbh Mela 2019 – पौराणिक कथानुसार जानिए क्या है कुम्भ का इतिहास

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में आयोजित होने वाला कुम्भ मेला विश्व का विशालतम स्वतः स्फूर्त समागम एवं तीर्थोत्सव है। पौराणिक कथानुसार देवता और दैत्य अलौकिक क्षीर सागर के मंथन में अमृत प्राप्ति के लिए एकत्र हुए तथा यह निश्चित किया कि समुद्र मंथन से निकलने वाले पदार्थों को वे आपस में बांट लेंगे।

 

इस मंथन में पौराणिक मंदराचल (पर्वत) को मथनी और नागों के सम्राट वासुकी को मथने वाली रस्सी की तरह प्रयुक्त किया गया। कहा जाता है कि दस हजार वर्षों तक देव दानव के सागर मंथन के फलस्वरुप अन्य रत्नों के साथ ही अमृत से भरा कलश भी प्राप्त हुआ। ‘अमृत पीने के बाद दानव अमर हो जायेंगे तब संसार का क्या होगा?’

 

इस चिन्ता से देवताओं ने अमृत-कलश को छिपाने का निर्णय लिया। इसके लिए देवों और दानवों के बीच संघर्ष चला, जिसके दौरान देवताओं के राजा इंद्र का पुत्र जयंत पहले स्वर्ग के आठ स्थानों पर तथा फिर पृथ्वी पर जहां-तहां अमृत कलश को छिपाने के लिए भागता रहा।

 

पुराणों के अनुसार इस संघर्ष से इंद्र के पुत्र जयंत ने अमृत कलश को हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक की भूमि पर रखा जहां अमृत-कलश की कुछ बूंदें भूमि पर गिरीं और इन स्थानों को निश्चित नक्षत्रीय दश में सदा-सदा के लिए अमरत्व प्रदान करने वाली दैवी ऊर्जा से समृद्ध कर गयीं। इन्हीं स्थानों पर कुम्भ मेलों का आयोजन किया जाता है।

 

Kumbh Mela 2019- शुभ मुहूर्त के साथ जानिए कौनसा है खास दिन

संगम नगरी प्रयाग में अर्ध कुम्भ को लेकर भव्य आयोजन शुरू हो गया है. साधू संतो का जमावड़ा भी देखने को मिलने लगा है. इस बार कुम्भ का बजट 4200 करोड़ रूपये बताया जा रहा है, कुम्भ के इस महाअयोजन का प्रथम शाही स्नान 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन होगा.

अर्ध कुम्भ में ये हैं कुछ ख़ास दिन और मुहूर्त

14 जनवरी – दोपहर 1 बजकर 26 मिनट से पुण्यकाल।

4 फरवरी- पूरे दिन स्नान दान किया जा सकता है लेकिन ब्रह्ममुहूर्त से सुबह 7 बजकर 58 मिनट तक का समय विशेष रूप से उत्तम होगा।

10 फरवरी- मध्याह्न से पूर्व का समय उत्तम है वैसे पूरे दिन स्नान दान किया जा सकता है।

मुहूर्त के हिसाब से

पौष शुक्ल एकादशी 17 जनवरी, पौष पूर्णिमा 21 जनवरी, माघ कृष्ण एकादशी 31 जनवरी, माघ शुक्ल पंचमी 10 फरवरी, माघ शुक्ल सप्तमी12 फरवरी, कुंभ संक्रांति 13 फरवरी और माघी पूर्णिमा 19 फरवरी इसी दिन कुंभ का समापन होगा। हलांकि यह मेला महाशिवरात्रि के दिन 4 मार्च तक चलेगा।

धारा 377, 497 और सबरीमाला फैसला, क्या जस्टिस दीपक मिश्रा SC के खिलाफ जा रहे हैं ?

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मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा के कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट के द्वारा समलैगिकता, एडल्ट्री और मंदिर मे महिलाओं के प्रवेश को ले कर तीन ऐतिहासिक फैसले दिए गए हैं। ये ऐसे फैसले है जो केंद्र में बैठी भाजपा सरकार के ‘संस्कारी भारत’ की परीकल्पना के बिल्कुल विपरीत जाते दिखते है।

संघ और भाजपा जहां समलैंगिकता के अधिकार को देश के लिए एक खतरा मानते थे। वहीं, भाजपा और संघ आज इस फैसले का बखूबी स्वागत करते दिख रहे हैं। धारा 377 पर आये फैसले से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री, राजनाथ सिंह ने कहा था कि “समलैंगिता एक कानूनी और सामाजिक अपराध है, इसे बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।”

वहीं, भाजपा के एक और दिग्गज नेता सुब्रमनीयम स्वामी ने तो इसे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बता दिया था। धारा 497 पर भाजपा के बहुत से वरिष्ठ नेताओं की राय बिल्कुल समान है। उनके अनुसार इस फैसले के आते ही विवाह जैसी संस्था को नुकसान पहुंचेगा और लोगों का भरोसा उस पर कम होगा।

इसके अलावा ज्यादातर नेता धारा 497 और सबरीमाला में महिलाओं के पक्ष मे आये फैसले का स्वागत करते हुए इसे महिला अधिकार के लिए एक अहम फैसला माना है। ‘उदार भारत’ की परीकल्पना करने वली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की एन.डी.ए. सरकार इन फैसलों के प्रति शुरू से ही मिलीजुली राय के साथ नरमी वाला रूख अपनाया हुआ है।

जहां कुछ नेता इसे विदेशी संस्कृति को बढ़ावा और भारतीय संस्कृति को दूषित करने वाला कानून बताया है। वहीं, दुसरी ओर वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने 2015 मे इन मुद्यो पर सरकार की नरमी रूख दे चुके थेष नवंबर 2015 मे उन्होंने कहा था कि “जब दुनिया भर में लाखों लोग वैकल्पिक यौन प्राथमिकताएं अपना रहे है, यह कहना जायज नहीं है कि उन्हे इसके लिए जेल में डाल दिया जाये।

यही नहीं, संस्कृति की पक्षदार और पारंपरिक सोच रखने वाली संघ भी समलैंगिक संबंधो को लेकर काफी नरम रूख रखते हुए उसे अपाराध मानने से इनकार किया है। मार्च 2016 मे संघ के वरिष्ठ नेता दत्तात्रेय हसबोले ने एक बयान मे समलैंगिकता को अपराध मानने से इंकार किया था।

वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संघ के प्रचार प्रमुख अरूण कुमार ने एक बयान मे कहा किए, “सुप्रीम कोर्ट की तरह हम भी इसे अपराध नहीं मानते लेकिन समलैंगिक शादियां प्राकृतिक नियमों के अनुरूप नहीं है। भारतीय
समाज में ऐसे रिश्तों को मान्यता देने की परंपरा नहीं रहीं है। इसलिए इस मुद्ये को समाज और मनोविज्ञान के स्तर पर हल किया जाना चाहिए”, जबकि धारा 377 के फैसले के दौरान कोर्ट ने कहा था कि यौन प्राथमिकता बायलॉजिकल और प्राकृतिक प्रक्रिया है कोई मानसिक बिमारी नहीं।

इंसान जैसा है उसे वैसा स्वीकार करते हुए हमे पुरानी धारणाओं को अलविदा कहना होगा। कोर्ट के फैसले भारत की बदलती जनमानस, महिला अधिकार और सामाजिक जरूरत के पक्ष में है। ये फैसले नये उदार भारत की नीव को मजबूत करते है। भाजपा और संघ के नेताओं के अलग-अलग बयानो से पता चलता है कि समलैंगिता और महिला अधिकारों को लेकर अभी भी कोई स्पस्ठीकारण नहीं है।

वहीं कई राजनैतिक विशेष्यज्ञों के अनुसार भाजपा के नेतावो द्वारा इन फैसलो के पक्ष मे दिये गये बयान सिर्फ और सिर्फ नौजवानो को रूझाने के लिए है, वो आज भी महिला अधिकार और समलैंगिकता के प्रति उतने रूढ़ीवादी है जितने पहले।

कांग्रेस का दावा है कि जहां उन्होने इन रिश्तों को मान्यता दिलवाने की दिशा मे कदम उठाए वही भाजपा ने रोड़े अटकाए है। बहरहाल धारा 377 ने बच्चों और पशुओं के साथ किये गये अप्राकृतिक यौन संबंध को अभी भी अपराध माना है और दोषी पाये जाने पर 14 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की
सजा हो सकती है।

शक्तिकांत दास रिजर्व बैंक के नए गवर्नर बनाए गए

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शक्तिकांत दास रिजर्व बैंक के नए गवर्नर बनाए गए।

आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव हैं शक्तिकांत दास।

उर्जित पटेल की जगह बने हैं गवर्नर।

शक्तिकांत दास नए गवर्नर
शक्तिकांत दास नए गवर्नर

भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले ने दिया पार्टी से इस्तीफा, बताई ये बड़ी वजह

उत्तर प्रदेश बहराइच से भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. सांसद ने आरोप लगाया कि बीजेपी समाज में बंटवारे की साजिश कर रही है. बता दें कि सावित्री ने कई बार दलितों को लेकर योगी सरकार पर हमला बोलती आ रही हैं.

कई बार दे चुकी हैं विवादित बयान

अपनी बयान को लेकर हमेशा सुर्ख़ियों में रहने वाली सांसद सावित्री बाई फुले ने हाल ही में मऊ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि ‘भाजपा सरकार संविधान व आरक्षण समाप्त करने का कुचक्र रच रही है जिसे बहुजन समाज किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। बहुजन समाज के लोगों को बाबा साहब डा.भीमराव आंबेडकर व भगवान गौतम बुद्ध जैसे महापुरुषों के बनाए गए संविधान विचार व व्यवस्था पर एकजुट होकर चलना होगा।’

सलेमपुर में भी दे चुकी हैं बयान

सलेमपुर (दाउदपुर) में आयोजित भीम चर्चा महोत्सव में उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर नहीं बुद्ध का मंदिर बनाने की बात कही थी। सावित्री ने कहा, ‘अयोध्या में राम नहीं बुद्ध का मंदिर बनना चाहिए।

 चुनाव आयोग के आश्वासन के बावजूद कितना सुरक्षित है EVM ?

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव का मतदान शांतिपूर्वक तो जरूर हो गया, लेकिन मतगणना को लेकर अभी भी घमासान जारी है. एक तरफ चुनाव आयोग का दावा है कि स्ट्रांग रूम में बंद सभी EVM  मशीनें सुरक्षित हैं. लेकिन इसके बाद भी डेढ़ घंटे तक सीसीटीवी बंद होना, बिजली गायब हो जाना, संदिग्ध व्यक्तियों का स्ट्रांग रूम के आस-पास देखा जाना ये सवाल जरूर उठाता है कि क्या EVM मशीनें सुरक्षित हैं.?

चुनाव ख़त्म होते ही EVM की कहानी शुरू

चुनाव ख़त्म होने के दूसरे दिन ही पहला मामला भोपाल की पुरानी जेल में बना स्ट्रांगरूम से आया. यहां करीब डेढ़ घंटे तक स्ट्रांगरूम के बाहर लगी एलईडी  बंद हो गई. इसके बाद सागर से बेहद आश्चर्यजनक घटना सामने आई. यहां तो मतदान के 48 घंटे बाद EVM मशीनें मुख्यालय पर पहुंची. कांग्रेस का आरोप है कि जिस गाड़ी से ये मशीनें आई हैं उस पर नंबर भी नहीं था. इस बात की खबर जैसे ही लोगों तक पहुंची हड़कंप मच गया. कांग्रेस अध्यक्ष कमलाथ से लेकर सिंधिया तक तुरंत चुनाव आयोग से बात कर इस बात की शिकायत की. वहीं इसपर भाजपा नेताओं का कहना है कि EVM का रोना कांग्रेसी हर एक चुनाव से पहले करते आ रहे हैं.

कांग्रेसियों ने किया दिन-रात एक

15 साल से वनवास झेल रही कांग्रेस को इस चुनाव से काफी आस है. मशीन के साथ कोई छेड़खानी ना हो इसलिए  जहां भी स्ट्रांग रूम बना हुआ है, वहां कांग्रेसी कार्यकर्ता कड़कड़ाती ठंड के बावजूद दिन रात डटे हुए हैं. और एक गिद्ध की तरह नजर बनाए हुए हैं.

बहरहाल, इन घटनाओं के बाद चुनाव आयोग अभी भी लोगों को आश्वासन दे रहा है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है और सारे मशीने अभी भी सुरक्षित स्ट्रांग रूम में बंद हैं. लेकिन चुनाव आयोग के आश्वाशन के बावजूद जिस तरह से दो बड़े मामले सामने आए हैं उससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि मतगणना के बचे हुए दिनों में चुनाव आयोग के लिए ये टेढ़ी खीर साबित हो सकती है.

क्या मार्च 2019 तक सभी ATM बंद हो जाएंगे ?

Confederation of ATM Industry (CATMi) ने चेताया है कि मार्च 2019 तक देश के 1,13,000 ATM बंद हो जायेंगे. CATMi नें आगाह करते हुए कहा है कि नकदी प्रबंधन योजनाओं के हालिया मानकों के चलते मार्च 2019 तक 50 फीसदी एटीएम बंद होने की संभावना है.

गौरतलब है कि समूचे भारत में कुल करीब 2,38,000 ATMs हैं जो कि औसतन बहुत कम है. आंकड़ो की माने तो 1ATM पर करीब 5,462 लोग निर्भर हैं, अौर बाकि कुछ बैंको पर निर्भर रहते हेैं.

ATM को कुछ खुद बैंक्स संचालित करते हैं तो कुछ ब्राउन लेबल ATM की कंपनियां बैंको के नाम से चलाती हैं. जिनको RBI से स्वीकृति मिली होती है. बता दें कि भारत में 50% ATM खुद बैंक संचालित करती है और 50% ब्राउन लेबल जैसी कंपनियां.

Confederation of ATM Industry (CATMi) जो ब्राउन और व्हाइट लेबल जैसी कंपनियों का संघ है जो की बैंको से रूपये लेकर खुद ATM को संचालित करती है और देखभाल करती है. उन्होंने बताया कि वो ऐसा अपनी मर्जी से नहीं कर रहे है बल्कि उनपे दबाव डाला जा रहा है. उनका कहना है कि हम अब ज्यादा कमाई नहीं कर पा रहे है और जिस प्रकार के नियम आ गए है RBI के द्वारा वो हमको मजबूर कर रहे रहे हैं.

आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले RBI ने इन कंपनियों के लिए दिशानिर्देश जारी किया था कि ATM में प्रयोग होने वाले सॉफ्टवे, हार्डवेयर और cassette swap method (ATM में नोट रखने वाला बॉक्स) में पदोन्नति करें. और ये सब करने में CATMi को 5000 करोड़ लगाने होंगे. जैसा कि CATMi ने बताया कि उनको इतना लाभ नहीं हो रहा की 5000 करोड़ खर्च करें. आगे उन्होंने कहा कि RBI जल्द अपने नियम को बदले या हमें फण्ड करे नहीं तो 2019 तक 1,30,000 ATMs बंद कर देंगे. अब देखना ये होगा की RBI इसपर क्या कदम उठाती है.

मध्यप्रदेश की वह विधानसभा जहां के 35 हजार मतदाता पलायन कर चले गए हैं महाराष्ट्र

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए आज यानी 26 नवम्बर की शाम 5 बजे से चुनाव प्रचार थम गया. सभी दल के नेता चुनाव जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिए हैं. लगभग हर एक गांव में जा-जा कर लोगों से वोट मांगने की अपील भी कर चुके हैं.

इन सबके अलावा मध्य प्रदेश में एक विधानसभा क्षेत्र ऐसा भी है जहां से लगभग 35 हजार लोग दूसरे राज्य में पलायन कर चुके हैं. उन पलायन कर चुके लोगों को वापस लाने को लेकर स्थानीय नेताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

दरअसल ये बैतूल जिले का भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र है. जो कि महाराष्ट्र- मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित है. इस विधानसभा क्षेत्र से अब तक लगभग 35 हजार वोटर्स बेरोजगारी के कारण महाराष्ट्र में पलायन कर गए हैं. जिनको 28 नवम्बर को होने वाले मतदान में  वापस लाने के लिए सभी स्थानीय दल के नेताओं का चिंता का विषय बना हुआ है. ये महाराष्ट्र सीमा से सटे हुए गांव के लोग हैं जिसमें खोकई से लेकर मेघा, चिठ्ठाणा, कोथलकुंड, सावलमेंढ़ा, तेढ़ीइमली, काकड़पानी, उदामा, निरोगमगी, येरापुर, जिरी, डेडवा कुंड, मालेगांव को लेकर और कई गाँव शामिल है.

पलायन करने की वजह

पलायन करने वाले लोगों की माने तो वे सब दो जून की रोटी के लिए घर बार छोड़कर जाते हैं और त्योहारों पर ही वापस आते हैं. इसके पीछे का कारण है गांव में काम न मिलना, अगर मिलता भी है तो दिन भर बहाए गए पसीने के बदले में सूखी रोटी ही नसीब हो पाती है. जिले में महिलाओं को 100 तो पुरुषों को 150 रुपया मिलता है. महाराष्ट्र में यह मेहनताना दो गुना से अधिक मिलता है.

विधायक रहते हैं 110 किलोमीटर दूर

भैंसदेही क्षेत्र चारो ओर पहाड़ी से घिरा हुआ क्षेत्र है. यह अनूसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है. यहां के वर्तमान विधायक भाजपा के महेन्द्र सिंह चौहान हैं. विधायक महोदय क्षेत्र से 110 किलोमीटर दूर दामजीपुरा गांव मेें रहते हैं. कभी-कभी ही विधायक जी इस क्षेत्र में आते हैं. क्षेत्रवासियों को अगर कोई समस्या बतानी हो तो पहले 110 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है.

बता दें कि यहां से 6 बार कांग्रेस तो 5 बार भाजपा ने चुनाव जीता है. वहीं इस बार भाजपा के महेन्द्र सिंह चौहान और कांग्रेस के धरमु सिंह सिरसाम के बीच मुकाबला हो रहा है.

स्थानीय नेता कर रहे हैं वापस बुलाने का प्रयास

पलायन कर चुके लोगों को वापस लाने के लिए क्षेत्र के स्थानीय नेता मिलकर प्रयास कर रहे हैं, ताकि वे 28 को मतदान दे सकें. इसके लिए वे गाड़ियों का इंतेज़ाम भी कर रहे हैं. गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में 28 तारीख को वोटिंग होनी है जिसका परिणाम 11 दिसम्बर को आएगा.

Post By – अमन तिवारी

मध्य प्रदेश चुनाव के लिए कांग्रेस ने जारी किया घोषणा पत्र

आगामी मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने घोषणा पत्र जारी कर दिया है. कांग्रेस ने इसे वचन पत्र के रूप में पेश किया है. 112 पन्ने के वचनपत्र में 973 घोषणाएं शामिल की गई हैं. जिसमें किसानों की कर्जमाफी, बेरोजगारी भत्ता और महिला सुरक्षा को लेकर ज्यादा जोर दिया गया है. वचन पत्र के मौके पर मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और चुनाव अभियान समिति के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया मौजूद थे

पढ़िए वचन पत्र में कुछ महत्वपूर्ण वादे

  • सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि 300 से बढ़ाकर 1000 करने का वादा
  • महिलाओं के स्व सहायता समूह के कर्ज माफ होंगे
  • लड़कियों के विवाह के लिये ₹51000 का अनुदान
  • किसानों के 75 हजार 800 करोड़ का कर्ज माफी का वादा
  • डीजल-पेट्रोल पर छूट मिलेगी
  • किसानों का बिजली बिल आधा करेंगे
  • रसोई गैस पर छूट की घोषणा
  • जन आयोग का गठन कर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ेंगे
  • विधान परिषद का गठन
  • ₹10000 प्रतिमाह हर परिवार के एक बेरोजगार युवा को दिया जाएगा
  • वकीलों, पत्रकारों के लिए सुरक्षा अधिनियम
  • पुलिस फोर्स में महिलाओं को प्राथमिकता
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गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को मतदान होना है जिसका परिणाम 11 दिसम्बर को आ जायेगा.