Thursday, July 25, 2024

क्या ख़तरे में है मीडिया एवं अभिव्यक्ती की स्वतंत्रता ?

भारत के संविधान में अनुच्छेद 19 के तहत देश के नागरिकों को लिखित या मौखिक रूप से अपना मत प्रकट करने हेतु अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है ।लेकिन वर्तमान समय में अगर हम परिस्थितियों पर ध्यान दें तो पाते हैं कि देश में प्रेस की स्वतंत्रता पर आघात लगातार बढ़ें हैं ।

  • साल 2014 से 2019 के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में पत्रकारों पर 198 गंभीर हमलों की ख़बरें आई, जिनमें 40 की मौत हुई हैं ।
  • विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत का वर्तमान स्थान 142वां हैं जबकि पिछले साल ये 140वां था ।

चूँकि देश में पत्रकारिता/मीडिया भी विचारों को साझा करने का एक साधन है। इसलिए इसमें प्रेस की आज़ादी को भी शामिल किया गया है । लेकिन वर्तमान समय में अगर हम परिस्थितियों पर ध्यान दें तो पातें हैं कि देश में प्रेस की स्वतंत्रता पर आघात लगातार बढ़ें है ।

चाहे मीडिया पर सेंसरशिप लगाने का मामला हो या फिर विभिन्न राज्यों में पत्रकारों पर बढ़ते हमले या उनपर बढ़ते राजद्रोह – मानहानि के मुक़दमें। इन सभी ने प्रेस की आज़ादी पर गहरा आघात किया है । समस्या का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गुजरात में एक पत्रकार द्वारा सरकार के संकट में होने की ख़बर छापने पर उसपर राजद्रोह के तहत मुकदमा दर्ज़ किया गया ।

देश में ऐसे एक नहीं बल्कि कई मामले हैं जो हाल ही में सामने आएं हैं, इनमें लगातार वृद्धि ज़ारी है ।
वहीँ इस दौरान पत्रकारों की जान को भी ख़तरे  बढ़ते नज़र आएं हैं । साल 2014 से 2019 के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में पत्रकारों पर 198 गंभीर हमलों की ख़बरें आईं जिनमें 40 की मौत हुई है ।

इन्हीं समस्याओं का नतीज़ा है कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भी भारत के स्थान में लगातार गिरावट ज़ारी है। भारत का वर्तमान स्थान 142वां है जबकि पिछले साल यह 140वां था ।
इन सब समस्याओं को देखते हुए देश में पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर मांगें लगातार तेज़ हो गई हैं । हरियाणा , महाराष्ट्र , छत्तीसगढ़ व केरल जैसे राज्यों ने इसके लिए प्रावधान भी किएं हैं ।

कई बार अभिव्यक्ती की स्वतंत्रता के मामलों को लेकर दूसरे पक्ष भी सामने आते रहते हैं। कई बार पत्रकारों व मीडिया संस्थानों द्वारा अपनी स्वतंत्रता को लाँघ कर स्वच्छंदता का प्रदर्शन भी सामने आता है। यह कृत्य पत्रकारिता के उसूलों के अनुरूप कतई नहीं है । कई बार सुप्रीम कोर्ट ने भी पित्त पत्रकारिता व प्रेस की आज़ादी जरूरी है पर असीमित नहीं जैसी बातें दोहराई हैं ।

देश में प्रेस कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया और व न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एसोसिएशन जैसी संस्थाएं विधमान तो हैं लेकिन बहुत सीमित शक्तियां होने के कारण ये निष्प्रभावी ही नज़र आती हैं । इसलिए वर्तमान समय की जरूरत है कि इन्हें शक्तियां देने और प्रभावी बनाने के लिए कदम उठाएं जाएं। इन्हें प्राथमिक स्तर के जाँच व कार्रवाई के अधिकार दिए जाएं । इसके अलावा एक देशव्यापी पत्रकार संरक्षण कानून की व्यवस्था की जाए। जिससे पत्रकार तथा पत्रकारिता दोनों निडर होकर समाज के सरोकार में अपना पूर्ण योगदान दे सकें ।

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