MP Election- अखिलेश यादव ने जारी की प्रत्याशियों की दूसरी सूची

MP Election – 28 नवंबर को मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में एक तरफ जहां 15 साल से सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी सत्ता बचाने के लिए एड़ी चोटी लगा रही है, तो वहीं दूसरी तरफ 15 साल का सूखा खत्म करने के लिए कांग्रेस पूरा दमखम लगा दी है।

भाजपा कांग्रेस के अलावा समाजावादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी चुनाव के लिए कमर कस चुके हैं। दरअसल मध्यप्रदेश चुनाव के लिए अखिलेश ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है।

ये है उम्मीदवारों की पहली लिस्ट

केके सिंह- सीधी जनपद
कंकर मुंजारे- परसवाड़ा
अनुभा मुंजारे- बालागढ़
मीरा यादव- निवाड़ी के टीकमगढ़ से
दशरथ सिंह यादव- पन्ना

 

उम्मीदवारों की दूसरी सूचि 

मध्य प्रदेश सपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव सिलवानी और पूर्व सपा प्रदेश अध्यक्ष अशोक यादव ग्वालियर ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ेंगे। इसके पहले अखिलेश यादव ने 6 प्रत्याशियों का ऐलान किया था जिसमें से बुधनी से प्रत्याशी ने अपना टिकट सपा को वापस कर दिया था।

बता दें कि 28 नवम्बर को मध्यप्रदेश में मतदान होने हैं जिसका परिणाम 11 दिसंबर को आ जायेगा।

Live UPDATE- इलाहाबाद छात्रसंघ चुनाव आ गया फाइनल परिणाम देखिये कौन जीता कहां से

AUSU ELECTION- इंतजार की घड़ी खत्म होने के साथ आज इलाहाबाद विश्विद्यालय में छात्रसंघ चुनाव सम्पन्न हो गया. करीब 8 बजे से शुरू हुए मतदान में 48.55% वोटिंग हुई।

बात दें कि बीते सालों के अपेक्षा इस साल वोट काफी ज्यादा पड़े हैं। वोट की गिनती शाम 6 बजे से शुरू की गई और परिणाम देर रात तक घोषित किये गए।

फाइनल परिणाम

*इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव परिणाम*

*अध्यक्ष-* उदय प्रकाश यादव SCS (3698)

*उपाध्यक्ष-* अखिलेश यादव NSUI (2158)

*महामंत्री-* शिवम सिंह ABVP (2806)

*सांस्कृतिक सचिव-* आदित्य सिंह NSUI (1832)

*उपमंत्री-* सत्यम सिंह शनी SCS (3199)

ईश्वर शरण और सी.एम.पी के परिणाम

श्याम प्रसाद मुखर्जी राजकीय महाविद्यालय के परिणाम

छात्रों में भी उत्साह

AUSU election updates

VNIT Nagpur – फूड प्वायजनिंग से 200 छात्रों की तबीयत बिगड़ी, ICU में भर्ती

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VNIT Nagpur – नागपुर में स्थित VNIT (महाराष्ट्र के विश्वेश्वरैय्या राष्ट्रीय प्रौद्यौगिकी संस्थान) कॉलेज में फ़ूड पोइजन से करीब 200 छात्रों की अचानक तबियत खराब हो गई। छात्रों को खून की उल्टियां के कारण उन्हें नजदीकी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. वहीं कुछ छात्रों को आईसीयू के लिए रेफ़र कर दिया गया है.

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प्रोटेस्ट करते हुए छात्र

क्या है मामला

दरअसल छात्रों का कहना है कि ये सब दूषित और कीड़े-मकोड़े युक्त खाने से हालत हुई है. बता दें कि छात्र ने इसको लेकर कई बार शिकायत भी कर चुके थे लेकिन कॉलेज ने उस पर कोई सुध नहीं ली।

हॉस्पिटल की रिपोर्ट को लेकर भी हंगामा

छात्रों का कहना है कि भर्ती छात्र की रिपोर्ट नहीं बताई जा रही। क्योंकि हॉस्पिटल कॉलेज से जुड़े हुए हैं। पूछने पर नार्मल बता कर टाल दे रहे हैं।

 

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प्रोटेस्ट करते हुए छात्र

 

 

 

इन आसान शब्दों में समझिये क्या है मस्जिद में नमाज पढ़ने पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

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अयोध्या मामला– गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद से जुड़े एक मुद्दे पर फैसला सुनाया है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद में नमाज इस्लाम में अनिवार्य नहीं बताने वाले अपने पूर्व फैसले को बरकरार रखा है साथ ही इसे बड़ी बेंच में भेजने से इनकार कर दिया है।
उक्त मामले में सुनवाई कर रहे पीठ में तीन जजों में जस्टिस अशोक भूषण, चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस नजीर शामिल रहे।

जानिए क्या है पूरा मामला

ये मामला सन 1994 का है जिसमे सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले में कहा गया था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है। कोर्ट ने स्‍पष्‍ट किया था कि मुसलमान कहीं भी नमाज पढ़ सकते हैं। वहीं इस मामले पर इलाहबाद हाई कोर्ट ने भी अपना फैसला सुनाया था और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। जिसमें राजीव धवन ने कहा था कि नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग है और जरूरी धार्मिक गतिविधि है। इस सन्दर्भ में संवैधानिक बेंच के फैसले को दोबारा विचार करने की जरूरत है।

बहरहाल, इस मसले पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने पूर्व फैसलों को बरकरार रखा है और वहीं दुसरे अयोध्या केस में 29 अक्टूबर से सुनवाई शुरू करने का फैसला किया है।

 

भगत सिंह जयंती -भारतीय युवाओं के नाम भगत सिंह का पत्र ‘युवक’

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Samacharup- 16 से लेकर 25 की उम्र तक मनुष्य की युवावस्था रहती है. ये ऐसा पड़ाव होता है जब आपको धूप छाँव का कुछ पता नहीं रहता, एक जूनून रहता है कुछ कर गुजरने का. ऐसे ही युवावस्था में भारत के तीन लाल भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने हँसते हँसते फांसी पर चढ़ गए थे.

मात्र 23 साल की उम्र में भगत सिंह ने ना जाने कितनी किताबे पढ़ डाली थी. अपने आखिरी समय में भी उन्होंने वकील प्राण नाथ मेहता से ‘रिवॉल्युशनरी लेनिन’ नामक किताब मंगवाकर पढ़ रहे थे लेकिन दुर्भाग्यवश भगत सिंह उस किताब को पूरा नहीं पढ़ पाए और उन्हें वक्त से 12 घंटे पहले फांसी दे दी गई.

भगत सिंह ने वैसे तो कई पत्र लिखे लेकिन उनमे से एक ये पत्र जो खासकर युवाओं के लिए समर्पित था.

आलोचना – 67 / वर्ष 32 / अक्टूबर-दिसम्बर, 1983

युवावस्था मानव-जीवन का वसन्तकाल है। उसे पाकर मनुष्य मतवाला हो जाता है। हज़ारों बोतल का नशा छा जाता है। विधाता की दी हुई सारी शक्तियाँ सहस्र-धारा होकर फूट पड़ती हैं। मदान्ध मातंग की तरह निरंकुश, वर्षाकालीन शोणभद्र की तरह दुर्द्धर्ष, प्रलयकालीन प्रबल प्रभंजन की तरह प्रचण्ड, नवागत वसन्त की प्रथम मल्लिका कलिका की तरह कोमल, ज्वालामुखी की तरह उच्छृंखल और भैरवी-संगीत की तरह मधुर युवावस्था है।

उज्ज्वल प्रभात की शोभा, स्निग्ध सन्ध्या की छटा, शरच्चन्द्रिका की माधुरी ग्रीष्म-मध्याह्न का उत्ताप और भाद्रपदी अमावस्या के अर्द्धरात्र की भीषणता युवावस्था में सन्निहित है। जैसे क्रान्तिकारी के जेब में बमगोला, षड्यन्त्री की असटी में भरा-भराया तमंचा, रण-रस-रसिक वीर के हाथ में खड्ग, वैसे ही मनुष्य की देह में युवावस्था। 16 से 25 वर्ष तक हाड़-चाम के सन्दूक में संसारभर के हाहाकारों को समेटकर विधाता बन्द कर देता। दस बरस तक यह झाँझरी नैया मँझधार तूफ़ान में डगमगाती रहती है। युवावस्था देखने में तो शस्यश्यामला वसुन्धरा से भी सुन्दर है, पर इसके अन्दर भूकम्प की-सी भयंकरता भरी हुई है।

इसीलिए युवावस्था में मनुष्य के लिए केवल दो ही मार्ग हैं – वह चढ़ सकता है उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर, वह गिर सकता है अधःपात के अँधेरे ख़न्दक में। चाहे तो त्यागी हो सकता है युवक, चाहे तो विलासी बन सकता है युवक। वह देवता बन सकता है, तो पिशाच भी बन सकता है। वही संसार को त्रस्त कर सकता है, वही संसार को अभयदान दे सकता है।

संसार में युवक का ही साम्राज्य है। युवक के कीर्तिमान से संसार का इतिहास भरा पड़ा है। युवक ही रणचण्डी के ललाट की रेखा है। युवक स्वदेश की यश-दुन्दुभि का तुमुल निनाद है। युवक ही स्वदेश की विजय-वैजयन्ती का सुदृढ़ी दण्ड है। वह महासागर की उत्ताल तरंगों के समान उद्दण्ड है। वह महाभारत के भीष्मपर्व की पहली ललकार के समान विकराल है, प्रथम मिलन के स्फीत चुम्बन की तरह सरस है, रावण के अहंकार की तरह निर्भीक है, प्रींद के सत्याग्रह की तरह दृढ़ और अटल है।

अगर किसी विशाल हृदय की आवश्यकता हो, तो युवकों के हृदय टटोलो। अगर किसी आत्मत्यागी वीर की चाह हो, तो युवकों से माँगो। रसिकता उसी के बाँटे पड़ी है। भावुकता पर उसी का सिक्का है। वह छन्दः शास्त्र से अनभिज्ञ होने पर भी प्रतिभाशाली कवि है। कवि भी उसी के हृदयारविन्द का मधुप है। वह रसों की परिभाषा नहीं जानता, पर वह कविता का सच्चा मर्मज्ञ है। सृष्टि की एक विषम समस्या है युवक। ईश्वरीय रचना-कौशल का एक उत्कृष्ट नमूना है युवक। सन्ध्या समय वह नदी के तट पर घण्टों बैठा रहता है। क्षितिज की ओर बढ़ते जाने वाले रक्त-रश्मि सूर्यदेव को आकृष्ट नेत्रों से देखता रह जाता है। उस पार से आती हुई संगीत-लहरी के मन्द प्रवाह में तल्लीन हो जाता है। विचित्र है उसका जीवन। अद्भुत है उसका साहस। अमोध है उसका उत्साह।

वह निश्चिन्त है, असावधान है। लगन लग गयी, तो रातभर जागना उसके बायें हाथ का खेल है, जेठ की दुपहरी चैत की चाँदनी है, सावन-भादों की झड़ी मंगलोत्सव की पुष्पवृष्टि है, श्मशान की निस्तब्धता, उद्यान का विहग-कल- कूजन है। वह इच्छा करे तो समाज और जाति को उद्बुद्ध कर दे, देश की लाली रख ले, राष्ट्र का मुखोज्ज्वल कर दे, बड़े-बड़े साम्राज्य उलट डाले। पतितों के उत्थान और संसार के उद्धारक सूत्र उसी के हाथ में हैं। वह इस विशाल विश्व-रंगस्थल का सिद्धहस्त खिलाड़ी है।

अगर रक्त की भेंट चाहिए, तो सिवा युवक के कौन देगा? अगर तुम बलिदान चाहते हो, तो तुम्हें युवक की ओर देखना पड़ेगा। प्रत्येक जाति के भाग्यविधाता युवक ही तो होते हैं। एक पाश्चात्य पण्डित ने ठीक कहा है – It is an established truism that youngmen of today are the Countrymen of tomorrow holding in their hands the high destinies of the Land. They are the seeds that spring and bear fruit. भावार्थ यह कि आज के युवक ही कल के देश के भाग्य-निर्माता हैं। वे ही भविष्य के सफलता के बीज हैं।

संसार के इतिहासों के पन्ने खोलकर देख लो, युवक के रक्त से लिखे हुए अमर सन्देश भरे पड़े हैं। संसार की क्रान्तियों और परिवर्तनों के वर्णन छाँट डालो, उनमें केवल ऐसे युवक ही मिलेंगे, जिन्हें बुद्धिमानों ने ‘पागल छोकड़े’ अथवा ‘पथ-भ्रष्ट’ कहा है। पर जो सिड़ी हैं, वे क्या ख़ाक समझेंगे कि स्वदेशाभिमान से उन्मत्त होकर अपनी लोथों से क़िले की खाइयों को पाट देने वाले जापानी युवक किस फ़ौलाद के टुकड़े थे। सच्चा युवक तो बिना झिझक के मृत्यु का आलिगन करता है, चोखी संगीनों के सामने छाती खोलकर डट जाता है, तोप के मुँह पर बैठकर भी मुस्कुराता ही रहता है, बेड़ियों की झनकार पर राष्ट्रीय गान गाता है और फाँसी के तख़्ते पर अट्टहासपूर्वक आरूढ़ हो जाता है। फाँसी के दिन युवक का ही वज़न बढ़ता है, जेल की चक्की पर युवक ही उद्बोधन-मन्त्र गाता है, कालकोठरी के अन्धकार में धँसकर ही वह स्वदेश को अन्धकार के बीच से उबारता है। अमेरिका के युवक-दल के नेता ‘पैट्रिक हेनरी’ ने अपनी ओजस्विनी वक्तृता में एक बार कहा था – Life is dearer outside the prisonwalls, but it is immeasurably dearer within the prison-cells, where it is the price paid for the freedom’s fight. अर्थात जेल की दीवारों से बाहर की ज़िन्दगी बड़ी महँगी है, पर जेल की काल-कोठरियों की ज़िन्दगी और भी महँगी है; क्योंकि वहाँ यह स्वतन्त्रता-संग्राम के मूल्य-रूप में चुकायी जाती है।

जब ऐसा सजीव नेता है, तभी तो अमेरिका के युवकों में यह ज्वलन्त घोषणा करने का साहस भी है कि, “We believe that when a Government becomes a destructive of the natural right of man, it is the man’s duty to destroy that Government. अर्थात अमेरिका के युवक विश्वास करते हैं कि जन्मसिद्ध अधिकारों को पद-दलित करने वाली सत्ता का विनाश करना मनुष्य का कर्त्तव्य है।

ऐ भारतीय युवक! तू क्यों गफ़लत की नींद में पड़ा बेख़बर सो रहा है! उठ, आँखें खोल, देख, प्राची-दिशा का ललाट सिन्दूर-रंजित हो उठा। अब अधिक मत सो। सोना हो तो अनन्त निद्रा की गोद में जाकर सो रह। कापुरुषता के क्रोड़ में क्यों सोता है? माया-मोह-ममता त्यागकर गरज उठ

“Farewell Farewell My true Love

The army is on Move;

And if I stayed with you Love,

A coward I shall prove.”

तेरी माता, तेरी प्रातः स्मरणीया, तेरी परम वन्दनीया, तेरी जगदम्बा, तेरी अन्नपूर्णा, तेरी त्रिशूलधारिणी, तेरी सिहवाहिनी, तेरी शस्यश्यामलांचला आज फूट-फूटकर रो रही है। क्या उसकी विकलता तुझे तनिक भी चंचल नहीं करती? धिक्कार है तेरी निर्जीवता पर! तेरे पितर भी नतमस्तक हैं इस नपुंसत्व पर! यदि अब भी तेरे किसी अंग में टुक हया बाक़ी हो, तो उठकर माता के दूध की लाज रख, उसके उद्धार का बीड़ा उठा, उसके आँसुओं की एक-एक बूँद की सौगन्ध ले, उसका बेड़ा पार कर और बोल मुक्त कण्ठ से – वन्देमातरम।

युवक!
भगतसिह का यह लेख ‘साप्ताहिक मतवाला’ (वर्ष: 2, अंक सं- 38, 16 मई, 1925) में बलवन्त सिह के नाम से छपा था। केवल 17 वर्ष कुछ महीने की उम्र में हिन्दी में लिखा यह लेख भगतसिह की भाषा के ओज और लालित्य की एक मिसाल है। इस लेख की चर्चा ‘मतवाला’ के सम्पादकीय कर्म से जुड़े आचार्य शिवपूजन सहाय की डायरी में भी मिलती है।

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Bihar Police, SI, ASI के पेपर से पहले इन वीडियो को जरुर देखकर जाएं !

Latest Bihar current affairs – अगर आप Bihar Police, SI, ASI की तैयारी कर रहे हैं तो ये पोस्ट आपके लिए ही है. दरअसल इन पोस्ट के लिए जरुरी है तैयारी भी जम के हो, इसीलिए हम आपके लिए एक वीडियो लाये हैं जिसमे आपको बिहार के सभी करंट अफेयर को लेकर चर्चा की गई है. ऐसे में अगर आप Bihar Police, SI, ASI जैसे पोस्ट के लिए पेपर देने जा रहे हैं तो उससे पहले ये वीडियो एक नहीं कम से कम 3 बार जरुर देखकर जाएं.

ये भी पढ़ें-SSC, BANK, PO/CLERK के लिए पढ़िए सितम्बर महीनें का करेंट अफेयर्स

यह वीडियो wifistudy के यूट्यूब से लिया गया है.

latest Bihar current affairs Part 2

लखीमपुर खीरी न्यूज़- बेटे का इलाज कराने के लिए पैसे नहीं तो मां ने डोनेट की किडनी

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लखीमपुर खीरी यूपी – मरहम लगा सको तो गरीब के जख्मों पर लगा देना, यूँ तो हकीम बहुत हैं अमीरों के इलाज की खातिर। किसी शायर की लिखी यह पंक्तिया उस वक्त बरबस ही याद आ गई जब सोशल मीडिया के एक स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप पर यह खबर वायरल हुई कि मां अपने बेटे के लिए किडनी डोनेट करने को तैयार है लेकिन इलाज के लिए झोली खाली है।

जिंदगी और मौत से जूझ रहे मां के लाडले को बचाने के लिए लोगों ने चंदा लगाने की गुहार लगाई है लेकिन जिस परिवार में दो जून की रोटी के लाले हों उस परिवार के लिए इलाज में खर्च होने वाली 7-8 लाख रुपए की भारी भरकम रकम जुटा पाना पहाड़ तोड़कर पानी निकालने जैसा ही है। दरअसल सिंगाही कस्बे के वार्ड 13 निवासी 20 वर्षीय छात्र जान मोहम्मद (मिस्टर) की दोनों किडनी खराब है। परिवार की ऎसी स्थिति नहीं कि वह उपचार का खर्चा उठा सके। पिता ने अपने पास जो था, वह सब कुछ इलाज में खर्च कर दिया, लेकिन अब उपचार के लिए पैसा कहां से लाए।

सिंगाही के वार्ड नं 13 निवासी नूर मोहम्मद मजदूरी करके परिवार का पेट पालते हैं । उनका लडका जान मोहम्मद राजा प्रताप विक्रम शाह इंटर कालेज में इंटर कर रहा है । पिछले वर्ष जान मोहम्मद की तबियत खराब होने पर उसे पीजीआई लखनऊ में दिखाया गया जहाँ डाक्टरों ने बताया कि उसकी दोनो किडनी खराब है बिना ट्रान्सप्लान्ट के कुछ नहीं किया जा सकता ।

इतना सुनते ही परिवार वालों के पैरों तले जमीन खिसक गई उसके बाद रिश्तेदारो ने चंदा करके लखनऊ के अस्पताल में भर्ती कराया। पीजीआई गुर्दा ट्रान्सप्लान्ट के लिए एक साल की वेटिंग दी गई । जान मोहम्मद की मां शाहजहाँ परवीन ने अपनी एक किडनी दान करने को तैयार हो गई । इलाज में हुए भारी कर्ज के बोझ तले दबे जान मोह के पिता ने प्रधानमंत्री कोष से अति शीघ्र सहायता की गुहार लगाई है मां उसे किडनी दे रही है। किडनी बदलने के लिए आठ लाख रूपए की आवश्यकता है। जान मोहम्मद के पिता नूर मोहम्मद मेंहनत मजदूरी कर अपने परिवार का गुजारा करते हैं।

सिंगाही खीरी से फ़राज़ खान की रिपोर्ट

SSC, BANK, PO/CLERK के लिए पढ़िए सितम्बर महीनें का करेंट अफेयर्स

Current Affairs in Hindi- SSC, BANK, PO/CLERK, UPSC, IAS/PCS की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए करेंट अफेयर्स के लिए अब कहीं भटकना नहीं पड़ेगा. क्योंकि  Samacharup     की टीम ने ये तय किया है कि अब से हर तरह के करेंट अफेयर्स वीडियो को एक ही जगह पर उपलब्ध कराया जाय, जिससे छात्रों को ज्यादा भटकना ना पड़े.

तो आपके लिए सितम्बर महीनें का Current affairs के साथ पहला वीडियो लाया जा रहा है. वीडियो Study IQ education से लिया गया है.

​ग्रेजुएशन के बाद इन चार सेक्टर्स में है सबसे ज्यादा सैलरी और स्कोप…

After Graduation Course

Education Job – ग्रेजुएशन के बाद छात्रों पर नौकरी करने की जिम्मेदारी आ जाती है. हर युवा की चाह एक ऐसे सेक्टर्स में नौकरी करने की होती है जहाँ सैलरी के साथ-साथ नौकरी में आगे बढ़ने का भी स्कोप हो. पर सही जानकारी के अभाव में छात्र भटक जाते हैं. काफी रिसर्च के बाद हम आपको बताने जा रहे हैं वो चार सेक्टर्स जहाँ आने वाले समय में ग्रेजुएट युवाओं के लिए सबसे ज्यादा नौकरियां और सैलरी की उम्मीद है.

1.कंपनी सेक्रेटरी ( CA )

कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) की नौकरी को काफी प्रतिष्टित नौकरियों में से एक माना जाता है. इस सेक्टर में पैसे के साथ ही आपको काफी मान-सम्मान भी मिलता है.एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार 2024 तक इस क्षेत्र में करीब 58,400 लोगों को नौकरी देने की उम्मीद है. सीएस की औसतन सैलरी सालाना करीब 1 करोड़ 16 लाख रूपए होती है.

2.मार्केटिंग मैनेजर

मार्केटिंग मैनेजर को ना सिर्फ एसी केबिन मिलता है बल्कि उन्हें मोटी सैलरी से भी नवाजा जाता है. इस सेक्टर में भी युवा अपने करियर को बना सकते हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले 8 से 9 सालों में यह क्षेत्र काफी नौकरियां पैदा करेंगी. एक मार्केटिंग मैनेजर की औसतन सालाना वेतन 83 लाख रूपए होती है.

3. आर्किटेक्चरल और इंजीनियरिंग मैनेजर

​ग्रेजुएशन के बाद इस सेक्टर में फ्रेशर्स को तो लाखों में वेतन नहीं मिलती. पर 4 से 5 साल के अनुभव के साथ आप लाखों कमा सकते हैं. चूँकि यह सेक्टर आर्किटेक्चरल से सम्बंधित है इसलिए युवाओं इस क्षेत्र का तभी चुनाव करना चाहिए जब उनके अंदर ड्राइंग और ज्योमेट्री की अच्छी समझ और रूचि हो.

4. कंप्यूटर और इनफार्मेशन मैनेजर

पूरी दुनिया जिस तेजी से डिजिटल हो रही है वहां कंप्यूटर से सम्बंधित क्षेत्र में नौकरी की कभी भी कमी नहीं होगी. एक अनुमान के अनुसार आने वाले 5 सालों इस सेक्टर से सम्बंधित करीब लाख नौकरियां आयेंगी. ऐसे में जिन छात्रों के अच्छा अनुभव और ज्ञान होगा उनके लिए ये एक सुनहरा अवसर होगा.

 

पाकिस्तान से लौटने के बाद सिद्धू ने दिया कुछ ऐसा जवाब कि हो गई सबकी बोलती बंद

Samacharup – पाकिस्तान प्राधानमंत्री के सपथ समारोह में शिरकत करने पहुंचे नवजोत सिंह सिद्धू बुरी तरह से आलोचनाएं झेल रहे हैं. विपक्ष सिद्धू को खरी खोटी सुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा. यहां तक की मुजफ्फरपुर और उत्तर प्रदेश के कानपुर में सिद्धू के खिलाफ देशद्रोह के मामले भी दर्ज हो चुके हैं.

पाकिस्तान से लौटने के बाद सिद्धू ने दिया जवाब

विपक्ष की तरफ से लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद सिद्धू ने सफाई देते हुए कहा कि मेरा पाकिस्तान जाना कोई राजनीतिक दौरा नहीं था बल्कि यह एक दोस्त का निमंत्रण था. जिसका सम्मान मैंने रखा, इसकी आलोचना गलत है. उन्होंने कहा कि शांति के पैगाम पहले भी होते रहे हैं. मोदी जी भी अचानक लाहौर चले गए थे.

इसके अलावा उन्होंने 2014 में अपने प्रधानमंत्री शपथ के दौरान भी नवाज शरीफ को बुलाया था. अटल जी भी दोस्ती का बस लेकर लाहौर गए थे. सिद्धू ने इस मामले में खुद की आलोचना पर दुख जताते हुए कहा कि भारत पाकिस्तान रिश्ते अगर मजबूत होंगे तो यह साउथ एशिया के लिए बहुत बड़ी उम्मीद होगी.

‘मेरे अटल जी’ – पीएम मोदी नें ब्लॉग लिखकर अटल जी के साथ…

सिद्धू के पाकिस्तान जाने पर विपक्ष का बयान

सिद्धू के पाकिस्तान जाने और पाकिस्तान सेना प्रमुख के गले मिलने को लेकर विपक्ष लगातार विरोध कर रही है. भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने हमला बोलते हुए कहा , राहुल गांधी के नेताओं को पाकिस्तान जाकर ऐसा क्या मिल जाता है. कांग्रेस के लिए हमारे सेना प्रमुख सड़क के गुंडे और पाकिस्तान के सेना प्रमुख सोणे दे मुंडे.

‘मेरे अटल जी’ – पीएम मोदी नें ब्लॉग लिखकर अटल जी के साथ…

सिद्धू मामले पर इमरान खान ने क्या कहा

वहीं इस मामले को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सिद्धू को भारत का शांतिदूत कहा है, और खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि इसकी आलोचना गलत है.