KBPG COLLEGE छात्रसंघ चुनाव – प्रकृति मिश्रा बनीं अध्यक्ष

इन दिनों जहां देश की नजर पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर है तो वहीं मिर्ज़ापुर में आज यानि शुक्रवार को KBPG COLLEGE छात्रसंघ चुनाव का अलग ही माहौल गरम है. बता दें कि KBPG कॉलेज छात्रसंघ चुनाव के परिणाम आ चुके हैं. abvb प्रत्याशी प्रकृति मिश्रा ने अध्यक्ष पद के लिए 300 वोटों से चुनाव जीतीं. वहीं दूसरी तरफ उपाध्यक्ष अंकित चौरसिया और महामंत्री पद के लिए शिवा पाण्डेय ने जीत दर्ज की.

ये प्रत्याशी थे मैदान में

अध्यक्ष पद क लिए

  1. Prakriti Mishra (Avbp)
  2. Manish Tiwari
  3. Ravi yadev( Samajwadi)

उपाध्यक्ष 

  1. Ankit chauratia
  2. Deepak kumar (Avbp)
  3. Gulshan pathek

महामंत्री

  1. Shiva pandey (Avbp)
  2. Abhishek singh

तो क्या सीबीआई के बाद अब आरबीआई की स्वायत्तता खतरे में ?

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सीबीआई का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब आरबीआई की स्वायत्तता को लेकर नया मामला सामने आ गया है. दरअसल मीडिया सूत्रों की माने तो केंद्र सरकार आरबीआई पर ऐक्ट ‘सेक्शन 7’ लागू कर सकती है. अगर ऐसा हुआ तो आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है.  

क्या है केंद्र और आरबीआई का मामला

ये पूरा मामला शुरू होता है नीरव मोदी के फरार होने के साथ. दरअसल नीरव मोदी के फरार होने के बाद सरकार ने आरबीआई का आलोचना करते हुए कहा था कि बैंक इतने बड़े घोटाले को पकड़ने में कैसे नाकाम हो सकता है. जिसके जवाब में आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा था कि सरकारी बैंकों के रेग्युलेशन के लिए सरकार उसे शक्तियां नहीं दे रही.

खैर थोड़े दिन बाद आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के एक बयान के बाद मामले ने फिर से तूल पकड़ लिया. दरअसल विरल ने अपने बयान में कह दिया कि सरकार रिजर्व बैंक की ऑटोनॉमी को खत्म करने के लिए कुछ ऐसे काम कर रही है जो चिंता का विषय है. इससे मॉनेटरी पॉलिसी को चलाना मुश्किल हो जाएगा. विरल के इस बयान के बाद केंद्र सरकार इस बात से नाराज है कि इस को सार्वजनिक क्यों कर दिया गया.

पीसीए है विवाद का मुद्दा 

पीसीए (प्रॉम्ट करेक्टिव एक्शन) के तहत आरबीआई ने कुछ नए नियम तय किए हैं. जिसमें करीब 12 बैंकों को तुरंत करवाई की श्रेणी में डाला है. ये बैंक ना तो कर्जा दे सकते हैं, ना तो नया शाखा खोल सकते हैं और ना ही डिविडेंड दे सकते हैं. वहीं केंद्र सरकार इस नियम में थोड़ा ढील देना चाहती है ताकि कर्ज देना थोड़ा बढ़ सके. लेकिन डिप्टी गवर्नर विरल ने पहले ही कहा था कि ये करना इसलिए जरुरी है कि ताकि बैलेंस सीट ना बिगड़े. 

 

‘सेक्शन 7’ के दो हिस्से

सेक्शन 7 के दो हिस्से हैं. पहला सलाह-मशविरा करना और दूसरा दिशा निर्देश जारी करना. सरकार ने सलाह- मशविरा के तीन पत्र आरबीआई को दे दिया है. अगर सरकार ने दूसरे हिस्से का इस्तेमाल किया तो गवर्नर उर्जित पटेल को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है. बहरहाल, उर्जित पटेल ने अपना पक्ष रख दिया है अब देखना है कि सरकार इस पर क्या फैसला लेती है, या फिर सीबीआई की तरह आरबीआई भी राजनीति के चपेट में आ जायेगा.

Post By- अमन तिवारी

कैलहट रेलवे स्टेशन पर हाइटेंशन तार गिरने से छह यात्री झुलसे

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उत्तर प्रदेश के कैलहट रेलवे स्टेशन पर हाइटेंशन तार गिरने से छह यात्री झुलस गए। इसमें एक की हालत गंभीर होने पर वाराणसी ट्रामा सेंटर भेजा गया है।

कैलहट स्टेशन की लूप लाइन पर सुबह करीब 10 बजे मालगाड़ी पर लदे स्लीपर को उतारने का काम चल रहा था। इसी दौरान एकाएक हाईटेंशन तार टूट गया।

इससे रेलवे के तीन मजदूर और तीन और लोग झुलस गए। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अधिकारी और आरपीएफ जीआरपी के जवान पहुंच गए। अफ़रातफरी के बीच घायलों को तत्काल कैलहट के निजी हास्पिटल में भेजा गया। घायलों में 32 वर्षीय गैंगमैन गुंजन, 30 वर्षीय ओमप्रकाश, 33 वर्षीय सूरज कुमार, 29 वर्षीय इसहाल, 32 वर्षीय मुन्ना, 40 वर्षीय भण्टु शामिल हैं।

गोरखपुर से अनिल कुमार की रिपोर्ट

चंबल- ग्वालियर में सिंधिया की अच्छी पकड़ के बावजूद 2013 में कांग्रेस कैसे हार गई चुनाव ?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हाल ही में 2 दिन के लिए ग्वालियर-चम्बल दौरे पर आए हुए थे। राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो राहुल गांधी का ये दौरा प्रचार-प्रसार के साथ-साथ नेता कार्यकर्ताओं को एकजुट करने को लेकर भी था।दरअसल ग्वालियर-चम्बल इलाके में ज्योतिरादित्य सिंधिया का पैठ माना जाता है लेकिन इसके बावजूद भी 2013 विधानसभा चुनाव में बड़े अंतर से हारना ज़हन में जरुर खटकता है कि आखिर ये कैसे हो गया ?

पैठ सिंधिया की लेकिन वोट भाजपा को

साल 2013 विधानसभा चुनाव में ग्वालियर- चम्बल की 34 सीटों में से बीजेपी को 20, कांग्रेस को 12 और बसपा को 2 सीटें मिली थ। कांग्रेस के इस हार के पीछे गुटबाजी का कारण माना जाता है। दरअसल 2013 में कांग्रेस अध्यक्ष रहे कांतिलाल भूरिया सभी कोंग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में नाकाम थे, जिस तरह से आज वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

वोट का बंटवारा

2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेसीनेताओं में टिकट को लेकर नोक झोक भी हार का कारण माना जाता है। दिग्विजय सिंह चुनाव से खुद को दूर रखाथा तो सिंधिया बड़े चेहरे के रूप में सामने थे। मामला ये हुआ कि दिग्विजय के क्षेत्रमें सिंधिया प्रचार करने से दूर रहे तो सिंधिया के क्षेत्र में और दूसरे नेता दूर रहे।इस वजह से कई नेताओं ने दूसरे दल में जाना उचित समझा। नतीजा चम्बल-ग्वालियर में पैठहोने के बावजूद कांग्रेस मात्र 12 सीटें ही जीत पाई।

एकजुट करने की कोशिश

2012018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मध्य प्रदेश के सभी नेताओं को एकजुट करने के लिए हरसंभव प्रयास करने में जुटे हुए हैं ताकि वोट बटवारा होने से रोका जाये और 15 साल का सूखा भी ख़त्म हो. यही कारण है कि राहुल गांधी 2 दिन के लिए ग्वालियर-चम्बल दौरे पर थे। इन दो दिन के दौरे पर राहुल गांधी कई धार्मिक स्थल भी गये और रोड शो भी किए। ख़ास बात यह है कि राहुल गांधी प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया को साथ लेकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इशारा साफ़ है कि इस बार राहुल गांधी किसी भी प्रकार की गुटबाजी नहीं देखना चाहते जो हार का कारण बनें।

टिकट का खेल

बहरहाल अभी यह कहना ठीक नहीं होगा कि कांग्रेस खेमे में सब कुछ ठीक ही चल रहा है। क्योंकि आने वाले दिनों में जैसे ही टिकट मिलने ना मिलने का खेल सामने आएगा एक बार फिर से 2013 जैसा माहौल देखने को मिल सकता है।

Post By- अमन तिवारी

विपिन का जनसंपर्क जारी,कानड़ ब्लॉक के 18 गांवों का किया दौरा

प्रेस नोट

आगर विधानसभा से कांग्रेस पार्टी के प्रबल दावेदार और NSUI प्रदेश अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने प्रतिदिन की भांति आज भी तूफानी जनसंपर्क करते हुए लोगों से मुलाकात की।

विपिन वानखेड़े ने आज अपने दौरे की शुरुआत नानुखेड़ी मीणा से की जो नान्याखेड़ी अहीर,शिवगढ़,भड़का,अरनिया पायरा, राजाखेडी, अभयपुर,पचौरा-पचौर चक,चिकली परमार,कुम्हार पिपल्या,लाड़वन, करवाखेड़ी, बीजनाखेड़ी, खेड़ा माधोपुर, कसाई देहरिया,चिकली गोयल होते हुए झिकड़िया तक चला।

जनसंपर्क के दौरान जब विपिन वानखेड़े नानुखेड़ा-मीणा गांव पहुंचे तो युवाओं ने उन्हें बताया की उनके गांव में 8वी तक स्कूल है जिसके कारण उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए आगर या कानड़ जाना बहुत महंगा पड़ता है पूरा समाज खेती पर निर्भर होने के कारण इस खर्च को वहन करना मुश्किल हैं इसलिए आप सबसे पहले हमारे 12वीं तक स्कूल खुलवाओ जिससे हम सब पढ़ लिख सकें।

पाचोरा में पचोर- चक में ग्रामीणों ने Pm आवास न मिलने की शिकायत की तो चिकली परमार के लोगों ने पेयजल और सड़क की समस्या बताई जिसपर वानखेड़े ने चुनाव बाद सभी समस्याओं को जल्द से जल्द हल करने का वादा किया।

राहुल गांधी के गुरूद्वारे जाने से क्या ‘सिख दंगे’ का दाग धुल जाएगा ?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दो दिन के लिए मध्य प्रदेश दौरे पर हैं जहा पर उन्होंने मंदिर, मस्जिद पर मत्था टेकने के बाद ग्वालियर के एक गुरुद्वारे पहुंचे। ये संयोग ही है कि जब भी राहुल गांधी गुरूद्वारे जाते हैं तो सिख दंगे का दाग उनका पीछा करता ही रहता है। यद्यपि राहुल गांधी नें इससे पीछा छुड़ाने के लिए सिख दंगो पर कई बार अपनी सफाई दे चुके हैं।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए थे सिख दंगे

31 अक्टूबर 1984 को तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके ही दो सुरक्षा गार्डों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। ह्त्या के 24 घंटे के भीतर पुरे भारत का इतिहास ही बदला गया। जगह-जगह पर हिंसा की ख़बरें आने लगी। हिंसा की चपेट में सबसे ज्यादा दिल्ली के आसपास इलाकों में करीब 3000 लोग मारे गए थे।

यह दाग बहुत ही गहरे हैं

यद्यपि राहुल गांधी इस बात को लेकर कितना भी इंकार कर दें लेकिन इस सच्चाई को नाकारा नहीं जा सकता। सिख दंगे के दाग से जगदीश टाइटलर और सज्जान कुमार जैसे कितने कांग्रेसी नेताओं का राजनीतिक कैरियर ही समाप्त हो गया। यही वजह है कि 21 साल बाद प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह ने संसद में माफ़ी मांगते हुए कहा था कि, ‘जो कुछ भी हुआ, उससे उनका सिर शर्म से झुक जाता है।’

कमलनाथ पर भी आरोप

वर्तमान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ पर भी सिख दंगे के आरोप लगते रहते हैं। उनपर आरोप है कि दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज में हुई हिंसा में कमलनाथ यदि वहां रक्षा करने पहुंचे थे, तो उन्होंने वहां आग की चपेट में आए सिखों की मदद क्यों नहीं की। वहां पर उनकी मौजदूगी का जिक्र पुलिस रिकॉर्ड में भी है।

दंगों की तपिश आज भी जहन में

सिख दंगे हुए लगभग तीन दशक से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन आज भी कई ऐसे सिख परिवार इस दर्दनाक घटना से उबर नहीं पाए हैं। आज भी कई ऐसे परिवार हैं जो दंगे का भयावह तस्वीर याद कर जिसमें अपनों को मरते हुए देखा था वो भुला नहीं पाते। इन दंगों में हजारों लोगों की जानें गई थी और न जाने कितने घरों को जला दिया गया था।

Post By- अमन तिवारी

कुर्सी बचाने के लिए परिवारवाद की लड़ाई में फंसा ‘विंध्य क्षेत्र’

मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में एक तरफ जहां भाजपा लगातार चौथी बार चुनाव जीतने के लिए कोई भी कसर छोड़ना नहीं चाहती । तो दूसरी तरफ 15 साल के सूखा को ख़त्म करने के लिए कांग्रेस पुरे जद्दोजहद में जुटी हुई है। वहीं इस बार के चुनाव में कुर्सी बचाने को लेकर भी एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। दरअसल दोनों पार्टियों में कुर्सी का मोह ऐसा है कि एक ही परिवार के एक से ज्यादा उम्मीदवार आपस में भीड़ते नजर आ रहे हैं।

परिवारवाद से पस्त भाजपा-कांग्रेस

विंध्य क्षेत्र में कुल 30 विधानससभा सीटे हैं। कहा जाता है कि विंध्य क्षेत्र के चुनावी गणित को जिसने समझ लिया वो मध्य पर राज करता है। लेकिन अबकी बार ये खेल परिवारवाद का है जिससे न केवल भाजपा बल्कि कांग्रेस भी परेशान है। परिवारवाद के चक्कर में भाजपा व कांग्रेस दोनों प्रत्याशी चुनने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं।

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Image credit- livecities.in

कुर्सी का मोह

कुर्सी का मोह कुछ ऐसा है कि रिश्ता भले ही खराब हो जाये लेकिन कुर्सी नहीं जानी चाहिए। यही कारण है कि कुर्सी बचाने के लिए कहीं बाप-बेटा-बहू चुनावी मैदान में है तो कहीं भाई-भतीजा एक दूसरे से भिड़ते नजर आ रहे हैं।

सीट एक लड़ने वाले तीन

1 – सतना जिले के रैगांव सीट से भाजपा के 3 उम्मीदवार हैं। जिसमें पूर्व मंत्री जुगल किशोर बागरी, उनके बेटे पुष्पराज बागरी और बहू वंदना बागरी अपनी दावेदारी ठोक रही हैं।
2- सतना जिले के अमरपाटन सीट से भी भाजपा के तीन उम्मीदवार। पूर्व विधायक राम पटेल, भाई शिव पटेल और राम पटेल की बहू विजय तारा पटेल।
3 – रीवा जिले के गुढ़ सीट से कांग्रेस के पूर्व विधायक श्रीनिवास तिवारी जीतते थे। उनके बाद अब बेटे सूंदरलाल तिवारी विधायक हैं। वहीं इस बार उनका भतीजा विवेक तिवारी भी दावेदारी ठोक रहा।
4 – सिंगरौली जिले के चितरंगी सीट से भाजपा की मुसीबत बनी हुई है। यहां पूर्व मंत्री जगन्नाथ सिंह के बेटे डॉ रविंद्र सिंह और बहू राधा सिंह दोनों दावेदार हैं।
5 – उमरिया जिले के बांधवगढ़ से सांसद और पूर्व विधायक और उनका बेटा दोनों इस बार चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं।
6- देवास जिले के खातेगांव-कन्नौद से कैलाश कुण्डल और उनकी पत्नी राजकुमारी कुण्डल दावेदार हैं। तो एक सीट पर श्याम होलानी और उनके बेटे मनोज होलानी दावेदार हैं।

बहरहाल आने वाले कुछ दिनों में ही कांग्रेस और भाजपा अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर देगी फिर देखना दिलचस्प होगा कि परिवारवाद में कुर्सी की लड़ाई किसके पाले में आती है।

Post By- अमन तिवारी

Bhadohi News – नहीं रहे डॉ. अभय सिंह, डेंगू से हुई मौत

भदोही – सरकारी अस्पताल गोपीगंज के जाने माने प्रसिद्ध डॉक्टर अभय सिंह की इलाज के दौरान BHU वाराणसी में मौत हो गई। डेंगू से मौत की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि मौत का कारण डेंगू ही है। भदोही CMO ने बताया कि बीएचयू से रिपोर्ट मिलने के बाद ही पूरा कारण स्पष्ट हो सकेगा ।

भदोही खबर

डॉक्टर अभय सिंह किसी परिचय के मोहताज नहीं थे उनके बारे में पूरे भदोही जिले में अगर किसी बच्चे से भी पूछ लिया जाए कि अभय सिंह कौन है तो बच्चे भी बता दिया करते थे। मरीजों के लिए देवता माने जाने वाले डॉक्टर अभय सिंह को करीब छः दिन पूर्व BHU में भर्ती कराया गया था।

 

नहीं हो रहा किसी को विश्वास

जैसे ही जैसे ये खबर लोगों तक पहुंच रही है कोई यकीन मानने को तैयार नहीं हो रहा। सभी का यही कहना है ये पॉसिबल ही नहीं है और तुरन्त किसी जानकर को फ़ोन करके पुछताछ करने में जुट जा रहे ।

Gopiganj bhadohi news

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गोपीगंज रिपोर्टर विशाल तिवारी जब इस बात की पुष्टि करने सरकारी अस्पताल पहुंचे तो वहां लोगों की भीड़ ऐसी थी जैसे कोई मेला लगा हो। विशाल ने बताया वहां पहुचे लोगों के आंखों में आंसू साफ दिखाई दे रहे थे।

सर्वे- आया अब तक का सबसे चौकाने वाला सर्वे, तीनों राज्यों में भाजपा पस्त !

MP election News -साल के अंत तक पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। जिसमे मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम राज्य शामिल हैं। चुनाव बेहद नजदीक है इसलिए सभी पार्टियां अपने अपने क्षेत्र में वोट बटोरने के लिये हरसंभव प्रयास करने में जुटी हुई हैं। वहीं दूसरी तरफ टीवी चैनल्स के अलग अलग सर्वे ने लोगों को आश्चर्य में जरुर डाल दे रहे।

हाल ही में जारी न्यूज़ नेशन के सर्वे के मुताबिक राजस्थान में कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बनाती दिख रही है तो वहीं मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के आसार हैं।

न्यूज़ नेशन सर्वे के मुताबिक…

मध्य प्रदेश- 230 सीट

  • 40 पर्सेंट वोट के साथ बीजेपी को 109 से 113 सीटें आने की संभावना,
  • 39 पर्सेंट वोट के साथ कांग्रेस को107 से 111 सीटें,
  • 9 पर्सेंट लोगों ने अन्य पार्टियों चुना जिसमें 8 से 10 सीटें आने की संभावना।

छत्तीसगढ़ -90 सीट

  • 38 पर्सेंट वोट के साथ बीजेपी 43 से 47 सीटें,
  • 36 पर्सेंट वोट के साथ कांग्रेस 36 से 40 सीटें,
  • 5 पर्सेंट वोट अजीत जोगी 3 से 7,
  • अन्य को 4 पर्सेंट वोट 1 से 3 सीटें।

राजस्थान -200 सीट

  • बीजेपी को यहां 71 से 75 सीटें
  • कांग्रेस को 113 से 117
  • अन्य को 10 से 14 सीटें

राजस्थान में बीजेपी को 32 पर्सेंट, कांग्रेस को 35 पर्सेंट और अन्य को 16 पर्सेंट वोट मिलने के आसार हैं। वोट पर्सेंट में काटें का मुकाबला देखने को मिल सकता है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 28 नवम्बर, छत्तीसगढ़ में 12,20 नवम्बर, राजस्थान व तेलंगाना में 7 दिसंबर को चुनाव होने हैं। वहीं पांचो राज्यों के परिणाम 11 दिसंबर को आएगा।

रायबरेली – इस चश्मदीद की जुबानी सुनिए कैसे हुआ ये बड़ा रेल हादसा

Raibareli News- रायबरेली के हरचंदपुर के रेलवे स्टेशन के नजदीक ट्रेन हादसा 4 डिब्बे पलटे , लगभग दर्जन लोग घायल 8 की मौत.

लखनऊ रायबरेली, लखनऊ सुल्तानपुर, लखनऊ कानपुर रेल रुट पर भी असर, कई ट्रेनों को निरस्त करने की तैयारी कुछ के रूट में परिवर्तन…

 

 

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