योगी सरकार में अब तक कुल 15 निलंबित हुए अफसरों की लिस्ट

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हाथरस में गैंगरेप मामले में SP विक्रांत वीर को योगी सरकार ने निलंबित कर दिया है। 2014 बैच के आईपीएस विक्रांत वीर इसी साल जून में हाथरस में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हुए थे। नालंदा बिहार के रहने वाले विक्रांत वीर योगी सरकार में सस्पेंड होने वाले 15 वें आईपीएस हैं। इनसे पहले कानून व्यवस्था न संभाल पाने और तमाम भ्रष्टाचार के आरोपों में 14 आईपीएस अफसर पहले ही सस्पेंड हो चुके हैं।

योगी सरकार में सस्पेंड होने वाले आईपीएस

  1. विक्रांत वीर – हाथरस के एसपी, निर्भया कांड में लापरवाही और शिथिल पर्यवेक्षण का आरोप
  2. जसवीर सिंह – 1992 बैच के इस सीनियर IPS को सरकार ने पिछले साल निलम्बित कर दिया था। सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने के कारण इनपर कार्रवाई की गयी थी। निलम्बन के समय जसवीर सिंह ADG के पद पर तैनात थे। निलम्बन अभी तक वापस नहीं हो सका है।
  3. दिनेश चन्द्र दुबे – 2003 बैच के IPS दुबे DIG रैंक के हैं। पशुपालन घोटाले में नाम आने पर निलम्बन। अभी तक तैनाती नहीं मिली है।
  4. अरविंद सेन – 2003 बैच के इस IPS को भी पशुपालन घोटाले में नाम आने पर सरकार ने निलम्बित कर दिया था। DIG रैंक के ये अफसर तैनाती के लिए अभी भी तरस रहे हैं।
  5. वैभव कृष्णा – नोएडा के एसएसपी रहते इन्हें सस्पेंड किया गया था। एक महिला के साथ आपत्तिजनक वीडियो में पकड़े गये थे। 2010 बैच के वैभव को अभी तक तैनाती नहीं मिली है।
  6. अपर्णा गुप्ता – 2015 बैच की इस IPS को सरकार ने तब निलम्बित कर दिया था जब कानपुर के संजीत यादव अपहरण कांड में इनका नाम सामने आया था। सस्पेंशन अभी भी जारी
  7. अभिषेक दीक्षित – 2006 के इस IPS को SSP प्रयागराज रहते निलम्बित किया गया था। कानून व्यवस्था न संभाल पाने के कारण इनपर गाज गिरी थी। अभी तक तैनाती का इंतजार। तमिलनाडू कैडर के अभिषेक प्रतिनियुक्ति पर यूपी आये हैं।
  8. मानिकलाल पाटीदार – 2014 बैच के इस IPS अफसर को सरकार ने एसपी महोबा रहते हाल ही में निलम्बित किया। मामला भ्रष्टाचार का है। जल्द तैनाती मिलनी मुश्किल।
  9. सुभाष चन्द्र दुबे – 2017 में सहारनपुर में हुए बवाल के बाद 2005 बैच के इस IPS को सस्पेंड कर दिया गया था। फिलहाल आजमगढ़ के डीआईजी हैं।
  10. डॉ। सतीश कुमार – बाराबंकी में एसपी रहते हुए इन्हें निलम्बित किया गया था। 2013 बैच के इस IPS अफसर पर रिश्वतखोरी के आरोप लगे थे। फिलहाल SP, SDRF हैं।
  11. एन कोलांची – बुलंदशहर में एसएसपी रहते इन्हें 2019 में निलम्बित किया गया था। कोलांची पर थानाध्यक्षों के तबादले में अनियमितता के आरोप लगे थे। 2008 बैच के ये IPS फिलहाल पीएसी में एसपी हैं।
  12. अतुल शर्मा – प्रयागराज के एसएसपी रहते इन्हें निलम्बित किया गया था। कानून व्यवस्था के मोर्चे पर नाकामी और भ्रष्टाचार के आरोप थे। 2009 बैच के IPS अतुल फिलहाल PAC में SP हैं।
  13. आरएम भारद्वाज – 2018 में संभल में SP रहते इस IPS को तब निलम्बित किया गया जब एक महिला को गैंगरैप के बाद जलाकर मार डाला गया था। 2005 बैच के इस IPS की पुलिस मुख्यालय में डीआईजी के पद पर तैनाती है।
  14. संतोष कुमार सिंह – 2009 बैच के इस IPS को प्रतापगढ़ में SP रहते सस्पेंड किया गया था। कानून व्यवस्था के मोर्चे पर नाकामी के आरोप थे। फिलहाल SP बुलंदशहर हैं।
  15. हिमांशु कुमार – ये पहले IPS हैं जिन्हें योगी सरकार ने निलम्बित किया था। एक ट्वीट के कारण इन्हें मार्च 2017 में सस्पेंड किया गया था। 2010 बैच के IPS हिमांशु इन दिनों PAC में SP हैं।

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जानिए क्या है किसान संशोधन बिल और क्यों हो रहा है इसका विरोध ?

देश की संसद ने हाल ही में किसान से जुड़े 3 बिलों कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक2020 , कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक2020 को मंजूरी दी है ।

  • बिल के विरोध में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने अपने पद से इस्तीफा दिया ।
  • अब किसान बुआई से पहले ही अपनी फ़सलों को व्यापारियों को बेच सकते हैं ।

इस बिल को लेकर देश के कई राज्यों में किसान आंदोलन पर उतर आएं हैं और इस बिल को वापस लेने की मांग कर रहें हैं । सरकार को किसानों के साथ ही संसद में भी विपक्ष द्वारा भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है । राज्यसभा में सांसदों का विरोध बड़े स्तर पर आ गया , उपसभापति हरिवंश सिंह ने संजय सिंह और डेरेक ओ ब्रायन समेत 8 सांसदों को सदन से निलंबित कर दिया । इस बिल के विरोध में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है ।

विपक्ष इस बिल को किसानों के साथ अन्याय करने वाला बता रहा है । वहीं सरकार ने इस बिल को किसानों को सशक्त बनाने वाला कदम बताया है । सरकार ने विपक्ष पर झूठ फैलाने और किसानों को भ्रमित करना का आरोप लगाया है । सरकार ने साफ़ किया है कि इस बिल में एमएसपी के मामले में कोई भी परिवर्तन नहीं किया गया है ।

क्या है बिल के प्रावधान – इन बिलों के अनुसार अब किसान अपनी फ़सलों को देश में कहीं भी जा कर बेच सकेंगे । इससे पहले किसानो को अपना अनाज मंडियों में ही बेचना पड़ता था , इसमें बिचौलिये उनका हक़ मार जाते थे । देश में लगभग 80 %  छोटे किसान हैं जिन्हें अपना अनाज बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता था । लेकिन अब इस बिल के पास होने के बाद इनकी पहुंच सीधे व्यापारियों तक होगी । बिल में कांट्रेक्ट कृषि को बढ़ावा देने की बात की गई है । अब किसान बुआई से पहले ही अपनी फ़सलों को व्यापारियों को बेच सकते हैं जिससे उनका जोख़िम भी कम होगा । इसके अलावा कई अनाजों को आवश्यक वस्तुओं की सूची से बाहर कर दिया गया है जिससे किसान अब अनाज को स्टोर कर के रख सकते हैं ।

विरोध के कारण – विरोध कर रहें लोगों का कहना है कि मण्डीयों के बाहर में खरीद पर किसी तरह का शुल्क ना लगने से देश की मण्डी व्यवस्था पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी । भविष्य में सरकार किसानों से फ़सल ख़रीदी भी बंद कर देगी और किसानों को व्यापारियों के भरोसे छोड़ देगी । इसके अलावा उन्होनें कहा कि सरकार भविष्य में एमएसपी को भी ख़त्म करने की योजना बना रही है । आंदोलन कर रहें किसानों का कहना है कि सरकार का यह बिल किसानों को बंधुआ मजदूरी की ओर ले जाएगा और वो इसका विरोध करते रहेंगे ।

 

 

सीएम योगी ने किया नोएडा में फिल्म सिटी के निर्माण का ऐलान

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यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने कई फिल्मी हस्तीयों की मौजूदगी में नोएडा में फ़िल्म सिटी के निर्माण का ऐलान किया है।

उन्होनें कहा कि उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर सें यमुना एक्सप्रेस वे के पास 1000 एकड़ के क्षेत्र में दुनिया का सबसे आधुनिक व ख़ूबसूरत फिल्म सिटी का निर्माण होगा। इस फ़िल्म सिटी के बनने से प्रदेश में रोज़गार, और पर्यटन आदि को भी बढ़ावा मिलेगा।

सीएम योगी ने कहा कि यूपी में अधूरा कुछ भी नहीं है , फि़ल्म सिटी में दुनिया की सभी सुविधाएं होंगी । यह निर्माण 50 साल की ज़रूरतों को ध्यान में रख़ते हुए होगा और इसमें टैक्स छूट देने पर भी विचार किया जा रहा है।

इस फ़िल्म सिटी में संग्रहालय, विश्वविद्यालय, फन सेंटर , होटल और हेलीपैड आदि का भी निर्माण होगा। इससे राज्य में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस मौके पर फ़िल्म जगत से अनुपम ख़ेर , परेश रावल, उदित नारायण , अनूप जलोटा और कैलाश ख़ेर सहित कई हस्ती शामिल हुएं।

आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में 52 ग्राम पंचायतों में नहीं होगा चुनाव

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उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में 52 ग्राम पंचायतों पर चुनाव होना था, जो अब नहीं होगा।

ये गांव नवसृजित नगर पंचायत और सीमा विस्तार में नगरीय दर्जा पा चुके हैं। शासन ने 5 नए नगर पंचायत और दो निकाय का सीमा विस्तार किया है। सर्वाधिक 13 ग्राम पंचायत नवसृजित नगर पंचायत भारत भारी में शामिल हुए हैं। सबसे कम कपिलवस्तु के हिस्से में दो गांव आए हैं।

सहायक चुनाव अधिकारी हरिचरण लाल के अनुसार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। चुनाव आयोग से निर्देश मिलने लगे हैं। पांच नगर पंचायतों और दो सीमा का विस्तार होने के बाद कई ग्राम पंचायतों का इसमें विलय हो गया है, जिससे संख्या में बदलाव संभव है।

एक सप्‍ताह में 31,661 शिक्षकों की भर्ती करेगी यूपी सरकार

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उत्‍तर प्रदेश में शिक्षक की नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिये बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बुनियादी शिक्षा (बेसिक शिक्षा) विभाग से एक सप्ताह के भीतर 31,661 सहायक शिक्षकों की भर्ती करने के लिए कहा है।

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि मूल शिक्षा विभाग ने सहायक अध्यापकों के 69,000 रिक्त पदों को भरने के लिए 6 जनवरी, 2019 को भर्ती परीक्षा आयोजित की थी।

7 जनवरी, 2019 के एक सरकारी आदेश के अनुसार, राज्य सरकार ने सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम प्रतिशत के रूप में 65% और पिछड़े व अन्य आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों के लिए 60% निर्धारित किया गया है।

”अब्राह्म अकॅार्ड” के बाद एक नई करवट लेगी मध्यपूर्व एशिया की राजनीति ।

मध्यपूर्व की जटिल राजनीति अब एक नया आयाम ले रही है । व्हाईट हाऊस के ओवल हाऊस में ऐतेहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किया गया । यूएई व बहरीन ने अब इजराइल के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर व द्विपक्षीय सबंधों के ऐलान कर दिए हैं ।

  • 1979 में मिस्त्र और 1994 में जाॅर्डन ने इज़राइल के साथ समझौता किया था ।
  • भविष्य में 4-5 अन्य अरब देश इस समझौते का हिस्सा बन सकते हैं ।

अरब क्षेत्र में अब 4 ऐसे  देश हो गए हैं जिनके इज़राइल के साथ द्विपक्षीय सबंध हैं । इससे पहले 1979 में मिस्त्र और 1994 में जाॅर्डन ने इज़राइल के साथ समझौते किए थें । इस समझौते को करवाने में अमरीका की प्रमुख भूमिका रही है । इस समझौते को अब्राह्म अकॅार्ड / ‘वाशिंगटन-ब्रोकेड समझौता’ नाम दिया गया है । इस मौके पर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि भविष्य में 4-5 अन्य अरब देश इस समझौते का हिस्सा बन सकतें हैं ।

समझौते की मुख्य शर्तें – इस समझौते के तहत यूएई और बहरीन इज़राइल के साथ अपने द्वीपक्षीय सबंध स्थापित करेंगे । इसके बदले में इज़राइल वेस्ट बैंक को को अपने हिस्से में जोड़ने की प्रक्रिया को निलंबित कर देगा । वेस्ट बैंक इज़राइल और जॉर्डन के के बीच स्थित है क्षेत्र है । इसे इज़राइल ने 1967 में 6 दिनों तक चले अरब – इज़राइल युद्ध में इसे अपने कब्जे में ले लिया था । इज़राइल ने भविष्य में इस क्षेत्र में बस्तियां बसानी शुरु की जिसपर समय – समय पर विवाद होता अाया है ।

समझौते की वजह – इज़राइल व अरब देश लगभग आधी से एक दुसरे के दुश्मन रहें हैं। लेकिन अब इनके एक साथ आने का प्रमुख कारण मध्यपूर्व में ईरान की बढ़ती सैन्य शक्ति और प्रभाव को बताया जा रहा है । ईरान के बढ़ते प्रभुत्व को देखते हुए क्षेत्र में एक अरसे से नए गठबंधन के कयास लगाए जा रहें थे । अरब देशों को एक नए तथा मजबूत सैन्य सहयोगी तो वहीं इज़राइल को भी एक नए बाज़ार की ज़़रूरत थी । इस समझौते के बाद दोनों की जरूरतें पूरी होेंगी।

प्रतिक्रियाएं – इस समझौते के बाद पूरी दुनिया से कई प्रतिक्रियाएं देखने को मिली है। लगभग सभी देशों ने इस समझौते पर ख़ुशी जताई है । भारत ने कहा कि – भारत हमेशा से ही मध्य पूर्व में शांति का पक्षधर रहा है और इस समझौते का स्वागत करता है । वहीं ईरान, तुर्की और पाकिस्तान ने इसका विरोध किया है और इसे फ़लिस्तीन के साथ धोख़ा बताया है। तुर्की ने भविष्य में यूएई के साथ संबंध ख़त्म करने की भी धमकी दी है , जबकि हास्यासपद बात ये है कि तुर्की उन सबसे शुरुआती देशों में से एक है जिसका इज़राइल के साथ द्विपक्षीय संबंध हैं ।

यूपी पंचायत चुनाव: निर्वाचन आयोग का 1 अक्टूबर से वोटर लिस्ट रिवीजन

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। आयोग के निर्देशों के अनुसार 1 अक्टूबर से यूपी में मतदाता सूची का पुनरीक्षण शुरू होगा। आयोग ने इसका विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है।

  • 1 अक्टूबर से 12 नवम्बर तक – बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर गणना एवं सर्वेक्षण
  • 1 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक- ऑनलाइन आवेदन करने की अवधि
  • 6 नवम्बर से 12 नवम्बर तक- ऑनलाइन प्राप्त आवेदन पत्रों की घर-घर जाकर जांच करने की अवधि
  • 13 नवम्बर से 5 दिसम्बर तक- ड्राफ्ट नामावलियों की कम्प्यूटराइज्ड लिस्ट तैयार करना
  • 6 दिसम्बर तक- ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन
  • 6 दिसम्बर से 12 दिसम्बर तक- ड्राफ्ट नामावली का निरीक्षण
  • 6 दिसम्बर से 12 दिसम्बर तक- दावे एवं आपत्तियां प्राप्त करना
  • 13 दिसम्बर से 19 दिसम्बर तक- दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण
  • 29 दिसम्बर- निर्वाचक नामावलियों का जन सामान्य के लिए अंतिम प्रकाशन.

क्या वर्तमान समय में ख़त्म हो रही है दल बदल कानून की प्रासंगिकता ?

हाल के कुछ वर्षोंं में देश की राजनीति में जनता द्वारा चुने जा रहे प्रतिनिधियों के द्वारा बड़े स्तर पर दल बदलने की घटनाएं आम हो गई हैं । इन घटनाओं ने  देश “आया राम गया राम” की कहावत को एक बार फिर से चरितार्थ करना शुरू कर दिया है ।

  • संसद ने साल 1985 में 52वें संविधान संशोधन द्वारा दल बदल विरोधी कानून पारित किया था ।
  • 1999 में विधि आयोग ने अपनी 170वीं रिपोर्ट में गठबंधन पार्टियों को भी इस कानून के दायरे में लाने की सलाह दी ।

देश में एक बार फिर से चुनाव आने वाले हैं , लेकिन चुनाव के साथ ही इस बार कई सीटों पर उपचुनाव भी होंगे जिसका प्रमुख कारण कई प्रतिनीधियों द्वारा दुसरे पार्टियों में चले जाने के कारण सीटों का रिक्त होना है । अपने निजी हितों के लिए दल बदलने की कुप्रथा गलत तो है हीं और तो और एक तरीके से यह जनता के साथ सीधे सीधे धोख़े सा प्रतीत होता है । इसके अलावा इससे राजनितिक संकट , पैसों की बर्बादी और विकास कार्यों में रुकावटें भी पैदा होती हैं ।

दल बदल कानून — इस स्थिति से बचने के लिए ही देश की संसद ने साल 1985 में 52वें संविधान संशोधन द्वारा दल बदल विरोधी कानून पारित किया था । इस कानून के अनुसार किसी प्रतिनिधि को अपने राजनितिक दल की सदस्यता छोड़ने , निर्दलीय होते हुए किसी दल में शामिल होने , सदन में पार्टी के खिलाफ वोट करने या वोटिंग में भागीदारी न करने पर आयोग्य घोषित किया जा सकता है ।
इसके अलावा अगर किसी मनोनीत सदस्य के द्वारा भी 6 महीनें की समाप्ति के बाद किसी दल की सदस्यता ली जाती है तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है । लेकिन किसी पार्टी के 2/3 विधायको के दल बदलने और विधानसभा अध्यक्ष के अपनी पार्टी से इस्तीफा देने के मामले को अपवाद रखा गया है । सदस्यों के अयोग्यता का फैसला अध्यक्ष ही करते हैं ।

असर — इस कानून के पारित होने के कुछ वक्त तक इसका असर देखने को मिला लेकिन समय गुज़रने तथा कानून पुराने होने के साथ साथ वही पुराने संकट नये रूप में फिर से सामने आने लगे हैं ।
इस कानून से कई बार राजनितिक संकटों से छुटकारा तो मिला लेकिन कई बार पार्टियों के द्वारा इस कानून की मदद से पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र को कुचलने की घटनाएं सामने आती रही । कई बार पार्टी लाइन से अलग राय रखने वाले तथा आवाज उठाने वाले सदस्यों को इसका शिकार बनाया जाता रहा है । यह कहना बिलकुल सही होगा की जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि के ऊपर पार्टी के विचार हमेशा भारी पड़ते हैं । दुनिया के अनेक लोकतंत्रों में पार्टीयों के सदस्य अपने पार्टी के खिलाफ़ काफ़ी मुख़र होते हैं फिर भी पार्टी में बने रहते हैं । इसके अलावा भारत में कई बार अध्यक्ष की निषपक्षता पर भी सवाल उठते रहतें है जिस कारण सदस्य कोर्ट का रुख करतें हैं ।
वर्तमान समय में सरकारों पर संकट और सदस्यों को निशाना बनाना दोनों घटनाएं आम हो गयी हैं जिसके खिलाफ कई बार विवाद खड़े होते रहतें हैं ।

सुधार की मांग — इन समस्याओं पर 1990 में बनी दिनेश गोस्वामी समिति व चुनाव आयोग का मत है कि प्रतिनिधियों को अयोग्य ठहराने का आ़ख़िरी फै़सला चुनाव आयोग की सलाह से राष्ट्रपति और गवर्नर के पास होना चाहिए । वहीँ 1999 में विधि आयोग ने अपनी 170वीं रिपोर्ट में गठबंधन पार्टीयों को भी इस कानून के दायरे में लाने की सलाह दी थी ।  केवल संकट के समय पार्टी के पक्ष में वोट न करने पर सदस्यों को अयोग्य करार देने की सलाह दी थी । इसके अलावा अयोग्य ठहराए जाने की अवधि को भी बढ़ाने की सलाह दी थी जिससे सदस्यों के मन में अपने स्वार्थ के लिए राजनीतिक संकट पैदा करने के खिलाफ डर बैठाया जा सके ।

दल बदल विरोधी कानून देश को राजनीतिक अस्थिरता से बचाने व कई अन्य बेहतर उद्देश्यों के लिए लाया गया था । लेकिन वर्तमान परिस्थिति देखें तो इसमें विद्यमान कमजोरी का पार्टी तथा सदस्य दोनों ही अपने स्वार्थ के लिए प्रयोग करतें हैं । इसलिए वर्तमान समय की जरूरत है कि इसमें शामिल विसंगतियों को दूर किया जाए जिससे भारत के लोकतंत्र को और बेहतर बनाया जा सके ।

यूपी में कोरोना के 6846 नए मामले, कुल संक्रमितों की संख्या 3 लाख के पार

उत्तर प्रदेश में आज कोरोना वायरस संक्रमण के 6846 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या अब 3 लाख को पार कर चुकी है।
हालांकि राहत की बात यह है कि शनिवार को आए मामले पिछले दो दिन के केस से कुछ कम हैं। बीते दो दिन लगातार 7000 से अधिक मामले दर्ज हुए थे। शुक्रवार को प्रदेश में कुल 7016 तो गुरुवार को सर्वाधिक 7042 नए केस आए थे।

मिर्जापुर में आसमान से बरसी आफत, बिजली गिरने से 21 भैंसों की हुई दर्दनाक मौत

मिर्जापुर जिले में एक ऐसी आफत आ बरसी कि एक साथ ही 21 भैंसों की मौत हो गई। इससे इलाके में हड़कंप मच गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, अहरौरा नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से बरसात के दिनों में पशुओं की भारी तादात चरवाहे जंगलों में चराने के लिए लेकर जाते हैं। शनिवार की दोपहर गरज बरस के साथ बूंदाबांदी होने लगी। इसी दौरान बिजली भी गिरी, जिसकी चपेट में आकर झरने के पानी मे बैठीं 16 भैंसे बुरी तरह से झुलस कर तड़पने लगी।
पशु पालक यह नजारा देख कुछ समझ पाते कि तभी फिर से वज्रपात हुआ और कुछ दूरी पर मौजूद पांच अन्य भैंस भी झुलस गईं।

पशुपालकों के सामने ही कुल 21 भैंसों ने तड़प कर दम तोड़ दिया। बिलखते पशुपालकों ने हादसे की सूचना स्थानीय पुलिस को दी। मौके पर पहुंचे उप निरीक्षक वीरेन्द्र सिंह ने राजस्व कर्मियों को घटना की जानकारी दी है।