Monday, April 22, 2024

​सरेआम अपनी हार स्वीकार कर रहें हैं नीतीश! जान कर हैरान हो जायेंगे आप

सोमवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में नीतीश  कुमार ने कुछ ऐसा बयां दिया जिससे ये साबित हो रहा है की वे राजनीति में अपनी हार मान चुके हैं. पटना में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि

” दिल्ली में पीएम की गद्दी पर मोदी का कोई मुकाबला नहीं कर सकता. 2019 में एक बार फिर पीएम की कुर्सी पर मोदी जी का ही कब्ज़ा होगा.”  

नीतीश कुमार ने स्पष्ट तौर पर कांफ्रेंस में शामिल हुए पत्रकारों से कहा कि प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी का कोई दूसरा विकल्प नहीं है.


पहले ही हार मान गए नीतीश!

आपको याद दिला दें तो साल 2014 में नीतीश कुमार ने एक ख्वाब देखा था. यह सपना पीएम की कुर्सी पर बैठने का था पर जब इस ख्वाब को नाकामी मिली तो उन्होंने बीजेपी का साथ ही छोड़ दिया.पर अब जब नीतीश ने यू-टर्न लेते हुए एनडीए में वापस से एंट्री की है तब से उनके सुर ही बदल गए हैं.

उनका प्रेस कांफ्रेंस में सरेआम यह ऐलान करना की

पीएम की गद्दी के लिए मोदी का कोई दूसरा विकल्प नहीं है, इसका मतलब तो यही निकलता है कि नीतीश जंग से पहले ही सबके सामने अपनी हार कुबूल कर रहे हैं ! 

दोबारा एनडीए में आने के बाद नीतीश को राजनीति में अपनी असल जगह का भी एहसास हुआ है. कांफ्रेंस में दिए गए बयान पर आगे उन्होंने कहा कि,

“मैं बिहार की सेवा सही तरीके से करूं, यही राष्ट्रीय राजनिति में मेरी भूमिका है.जदयू की इतनी बड़ी हैसियत नहीं है कि वह नेशनल एस्पिरेशन पाले.”


फिर बरसे लालू पर

आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में नीतीश कुमार लालू पर भी जमकर बरसे. उन्होंने कहा कि,

” कुछ लोग धर्म निरपेक्षता की आड़ में धन कमाने में लगे हुए थे.मेरे लिए सिर्फ दो ही रास्ते थे या तो भ्रस्टाचार से समझौता करूँ या फिर इस भ्रस्टाचार से दूरी बनाऊं. मैं शुरुआत से ही बेनामी सम्पति पर कड़ाई के पक्ष में था.”


आगे उनहोंने लालू यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि,

“लालू ने मुझे कुछ नहीं दिया है बल्कि मैंने उन्हें नेता बनाया है. लालू प्रसाद ने मज़बूरी में आकर मुझे सीएम की कुर्सी दी थी.अपनी गरज से मेरे नाम की घोषणा की है.महागठबंधन की सरकार बनने के बाद किसी समारोह में लालू- नीतीश जिंदबाद के नारे लगते थे, तो उन्हें लगता था कि नीतीश कुमार का नाम क्यों लिया? “

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  1. […] रिपोर्ट के अनुसार जेडीयू + भाजपा + एलजेपी की सरकार में 29 में से 22 मंत्री ऐसे हैं जिनके खिलाफ़ आपराधिक मामलें दर्ज है। वहीं पिछली सरकार में ये आंकड़े 28 में से 19 मंत्री के खिलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज थे। बता दें की बिहार एलेक्शन वॉच और एडीआर की ओर से मुख्यमंत्री सहित 29 मंत्रियों के चुनावी हलफनामे के विश्लेषण के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई. (ये भी पढ़ें:- ​सरेआम अपनी हार स्वीकार कर रहें हैं नी…) […]

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