इन कारणों से नहीं हो पा रही अखिलेश और मुलायम के बीच ‘सुलह’…

यूपी चुनाव:- ​समाजवादी पार्टी में घमासान मची हुई सुलह होने का कोई नामो निशान नहीं दिख रहा है, कई कोशिशों के बावजूद पार्टी दो खेमो में बट चुकी है।

सभी ये जानते हैं कि, समाजवादी पार्टी में ये रार क्यों शुरू हुई। लेकिन आइये हम आपको बताते हैं कि पार्टी में सुलह क्यों नहीं हो पा रही है.?



जिद बनी मुसीबत:-

  • दोनों खेमे में सुलह न हो पाने की सबसे बड़ी वजह है सपा प्रमुख और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की जिद।दोनों ही अपनी-अपनी शर्तों पर सुलह करना चाहते हैं जो मुमकिन नहीं हैं।

अखिलेश की मांग:– 

  • सूत्रों की मानें तो सारी फसाद की जड़ रामगोपाल यादव की वापसी ही है। दरअसल अखिलेश यादव चाहतें है रामगोपाल यादव की पार्टी में वापसी हो। इसके अलावा अखिलेश विधानसभा चुनाव तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर रहना चाहते हैं। अमर सिंह का पार्टी से निष्कासन। शिवपाल सिंह यादव को राष्ट्रीय राजनीति में भेजा जाये। बर्खास्त युवा नेताओं की पार्टी में वापसी।

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मुलायम सिंह का इंकार:-

  • मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सुलह की इन शर्तों से सपा प्रमुख को ऐतराज है। सपा प्रमुख नही चाहतें है कि रामगोपाल को पार्टी में वापस बुलाया जाये और ना ही अखिलेश अपने मर्जी के रहें।  इन्ही कारणों से अब तक सुलह की 7 कोशिशें बेकार हो चुकी हैं।

चुनाव आयोग ने दिया अखिलेश यादव को बड़ा झटका…

​यूपी चुनाव:- चुनाव अब सर पर आ चुका है ऐसे में चुनाव आयोग भी सख्त हो गया है, अगर कोई भी आचार संहिता का उल्लंघन करता पाया गया तो उस पर कड़ी कार्यवाई होगी।

इन्ही बिच अखिलेश यादव को चुनाव आयोग की तरफ से बड़ा झटका लगा है, दरअसल रविवार को चुनाव आयोग ने यूपी शासन को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब सीएम अखिलेश की फोटो वाला स्कूल बैग, राशन कार्ड नहीं बांटे जाएंगे। इसके साथ ही आयोग ने सभी सीयूजी नंबर्स में लगे कॉलर ट्यून को भी बदले जाने का निर्देश दे दिया।

…तो पाकिस्तान हो जायेगा विश्वकप से बाहर

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विश्वकप:- 2019 में होने वाली आईसीसी विश्व कप में पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। दरअसल 2019 में होने वाले विश्वकप से पाकिस्तान का बाहर होना लगभग तय दिख रहा है।

आपको बता दें कि पाकिस्तान अभी एकदिवसीय टीम रैंकिंग में सबसे नीचे पायदान पर मौजूद है शुक्रवार से आस्ट्रेलिया में शुरू हो रही पांच मैचों की वनडे सीरीज में उसका मुकबला विश्व चैंपियन आस्ट्रेलिया से होना है

पाकिस्तान इस सीरीज में अच्छा प्रदर्शन कर अपनी रैंकिंग सुधारते हुए विश्व कप के लिए सीधे क्वॉलिफाई करना चाहेगा जो ऑस्ट्रेलियाई टीम की फॉर्म को देखते हुए कठिन लग रहा है। वनडे रैंकिंग में टॉप टीमें सीधे वर्ल्ड कप के लिए क्वॉलिफाई कर लेती हैं। उसके बाद की रैंकिंग वाली टीमों के लिए क्वॉलिफाइंग मैच खेलने पड़ते हैं। पाकिस्तान पर इसी राउंड में खेलने का खतरा मंडरा रहा है।

यह है मौजूदा स्थिति ऐसे होंगे क्वॉलिफाई…

1-    30 सितंबर 2017 की आईसीसी वनडे        टीम रैंकिंग से होगा फैसला

2–    07 शीर्ष टीमें और विश्व कप का मेजबान इंग्लैंड करेंगे सीधे क्वॉलिफाई

3-   30 मई से 15 जुलाई2019 तक होने वाली विश्व कप में होंगी ये 8 टीम

4-   04 निचली रैंकिंग की टीमें 2018 में विश्व कप क्वॉलिफायर में हिस्सा लेंगी

5-   06 एसोसिएट देशों की टीमें भी आईसीसी विश्व क्रिकेट लीग से आएंगी क्वॉलिफायर में

6-    02 टीमें इस क्वॉलिफायर में शीर्ष पर रहते हुए विश्व कप में क्वॉलिफाई करेंगी।।

चुनाव आयोग की फटकार के बावजूद साक्षी महाराज ने दिया एक और विवादित बयान…

​यूपी चुनाव:- भारतीय जनता पार्टी के सांसद साक्षी महाराज जो विवादित बयान के लिए जाने जाने जाते है, कुछ दिन पहले 4 पत्नी और 40 बच्चे को लेकर बयान दिए जिस वजह से सुर्खियों में आये थे जिसपर चुनाव आयोग ने उन्हें कड़ी फटकार भी लगाया था।

लेकिन लगता है साक्षी महाराज पर इसका को कोई असर नहीं पड़ने वाला क्योंकि उन्होंने अब एक बार फिर मुस्लिमो को लेकर एक विवादित बयान दे दिया है। साक्षी महाराज का कहना है कि आखिर आतंकी एक ही कौम से क्यों आते हैं? साक्षी ने कहा कि हमें पाकिस्तान से खतरा नहीं है। बल्कि आस्तीन के सांपों से खतरा है जो इस देश में रहते हैं, इस देश का खाते है, देश का पहनते है लेकिन गीत पाकिस्तान का गाते हैं। गुणगान आतंकियों का करते हैं 

बीजेपी सांसद ने कहा कि  कहने को तो लोग कहते हैं कि आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता है। लेकिन आप ही बताएं मुंबई में हमला करने वाला हो या पाकिस्तान के पेशावर में ही बच्चों की हत्या करने वाला हो, लेकिन ये सभी आते तो एक ही समुदाय से हैं।

जन वेदना सम्मेलन में बरसे राहुल गाँधी, एक क्लिक में पढ़े पूरी खबर…

​कांग्रेस:- नये साल के एक दिन पहले ही छुट्टी बिताने निकल पड़े कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी इस साल का अपना पहला भाषण दिए।

  • जन वेदना सम्मेलन में पहुंचे राहुल गाँधी ने मोदी सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि ढाई साल पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि हिन्दुस्तान को स्वच्छ बना दूंगा। सभी को झाड़ू भी पकड़ाया, फैशन था, तीन-चार दिन चला, खुद भी झाड़ू पकड़ा, फिर भूल गए।

 

इसके बाद उन्होंने पीएम मोदी का मजाक उड़ाते हुए कहा कि जिन्हें योग नहीं आता उन्हें पद्मायन नहीं कर चाहिए। साथ ही बाबा रामेदव पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी के फैसले की सभी अर्थशास्त्रियों ने निंदा कीलेकिन इस सरकार के पास अपना होममेड अर्थशास्त्री हैं। इस सरकार के अर्थशास्त्री रामदेव हैं।

पीएम मोदी का नोटबंदी का फैसला पूरी तरह अपरिपक्व फैसला था। नोटबंदी की वजह से कई लोगों की नौकरी चली गई। राहुल ने कहा कि पीएम मोदी के फैसले ने देश के अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ दी।

नोटबंदी:- पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदम्बरम ने मोदी सरकार पर लगाया ये पांच बड़ा आरोप…

नोटबंदी:- ​8 नवम्बर के बाद नोटबंदी से हो रही लोगों को परेशानी के वजह से केंद्र सरकार पर लगातार विरोध किया जा रहा है।इन्ही कड़ी में आज पूर्व वित्त मंत्री पी.चिंदबरम ने भी नोेटबंदी के फैसले पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

  • दरअसल कांग्रेस के जन वेदना सम्मेलन में पूर्व वित्त मंत्री ने उन्होंने दावा किया कि नोटबंदी पर मुहर के लिए कैबिनेट की बैठक नहीं बुलाई गई. चिदंबरम के मुताबिक सरकार के मंत्रियों को तब तक कैदियों की तरह बंद रखा गया जब तक पीएम ने इस फैसले का ऐलान नहीं किया.

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पि.चिदम्बरम ने लगाया ये आरोप:-

  1. नोटबंदी से रोजगार और वेतन कम होंगे, इस फैसले से ऑटोमोबाइल और टेक्स्टाइल सेक्टर पर विपरीत असर
  2. 80 फीसदी छोटे और मध्यम दर्जे के उद्योग बंद होने का खतरा, रिजर्व बैंक पर नोटबंदी का फैसला थोपा गया.
  3. जिस मीटिंग में आरबीआई ने फैसले को मंजूरी दी उसमें बैंक के तीन में से सिर्फ दो डायरेक्टर मौजूद थे.
  4. मोदी सरकार ने आरबीआई को ‘छोटे विभाग’ में तब्दील करके रख दिया है.
  5. नोटबंदी से जीडीपी दर 2 फीसदी तक गिर सकती है. इस दर में 1 फीसदी गिरावट का मतलब है 1.5 लाख करोड़ का नुकसान।

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यूपी चुनाव:- गठबंधन को लेकर आई बड़ी खबर, प्रियंका ने कहा…

गठबंधन:- यूपी चुनाव गठबंधन को लेकर चर्चा जोरों से है, लगातार ये अटकलें लगाये जा रहे की गठबंधन होगा या नहीं। इन्ही बीच कल (मंगलवार) को पुरे दिन मीडिया में ये चर्चा बना रहा की प्रियंका गांधी वाड्रा और सपा सांसद व अखिलेश यादव की पत्नी दोनों मिलकर गठबंधन की बात करने वाली हैं।

दरअसल इन दोनों महिलाओं के मुलाकात से ऐसा माना गया कि सपा और कांग्रेस के गठबंधन पर वाकई में अहम भूमिका निभा सकती है। और आखिरकार प्रियंका गांधी ने इसकी तस्वीर साफ कर दी। बतादें प्रियंका गांधी वाड्रा ने दफ्तर से इस तरह की किसी भी खबर से इनकार किया है। प्रियंका गांधी के ऑफिस ने बताया है कि प्रियंका गांधी न तो अभी तक डिंपल यादव से मिलीं हैं और न ही उनका इस तरह का कोई प्लान है

सपा-कांग्रेस में गठबंधन को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई हैं। हालांकि दोनों पार्टियों के कई नेताओं ने कहा है कि गठबंधन नहीं होगा, लेकिन कांग्रेस की सीएम फेस शीला दीक्षित ने गठबंधन होने की स्थिति में अखिलेश के लिए पीछे हटने का ऐलान भी कर चुकी है।

यूपी चुनाव:- ओवैसी ने चली ये बड़ी चाल, जिससे विपक्ष पार्टी सदमे में…

UPelection:- यूपी चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहा है वैसे वैसे इसका रोमांच और बढ़ता चला जा रहा है। चुनावी रण में अब ओवैसी ने ऐसा चाल चला है जिससे विपक्षी पार्टियों को भारी नुकसान हो सकता है।

दरअसल यूपी चुनाव में अपना खाता खोलने के लिए तैयार ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इण्‍डिया मजलिस-ए-इत्‍तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) ने अपने 11 उम्‍मीदवारों की सूची जारी कर दी है। बता दें कि एआईएमआईएम का दमखम प्रदेश बेशक अन्य दलों के मुकाबले ज़्यादा न हो लेकिन इससे अन्य दलों का खेल बदल गया है। इन सभी 1सीटों पर मुस्लिम वोटरों की भूमिका अहम है। 

  • ओवैसी को उम्मीदवार उतारने से सपा, बसपा और कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है वही दूसरी तरफ आईएमआईएम की इस सूची आने से भाजपा खेमा खुश है।

इसके पीछे दो वजह हैं। पहले जिन सीटों पर एआईएमआईएम ने अपने उम्मीदवार घोषित किया हैं वहाँ अधिकतर सपा और बसपा के विधायक है। कुल तीन सीटों पर भाजपा विधायक हैं और वहाँ भी दुसरे नंबर पर भी उम्मीदवार बसपा सपा या कांग्रेस के हैं। दूसरी वजह ये है कि दरअसल इन 11 सीटों पर मुस्लिम वोट बैंक अधिक है और एआईएमआईएम की सूची में सभी उम्मीदवार मुस्लिम ही हैं।

 

कांग्रेस ने चुनाव आयोग से की ये बड़ी मांग, मोदी को…

​ELECTION:- चुनाव तारीख सर पर आ गया है ऐसे में चुनाव प्रचार को लेकर चुनाव आयोग सख्त हो गया है इन्ही को देखते हुए अब कांग्रेस ने चुनाव आयोग से बड़ी मांग कर दी है।

  • दरअसल कांग्रेस ने सोमवार को चुनाव आयोग से पांच राज्‍यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पीएम नरेंद्र मोदी के पोस्‍टर हटाए जाने की मांग की। कांग्रेस सचिव और कानून एवं मानवाधिकार विभाग के प्रमुख के.सीमित्‍तल ने चुनाव आयोग को लिखी शिकायत में इसे लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

कांग्रेस ने अपनी शिकायत में कहा, आयोग से अनुरोध किया जाता है कि वह इन राज्‍यों में पेट्रोल पंपों व अन्‍य किसी भी स्‍थान से प्रधानमंत्री नरेंद्र की होर्डिंग्‍स, केंद्र सरकार या विभागों के किसी भी विज्ञापन, बैनर से उनकी तस्‍वीर हटवाने का आदेश दे।” मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त नसीम जैदी और अन्‍य चुनाव आयुक्‍तों को लिखे पत्र में, मित्‍तल ने कहा कि आयोग ने चुनावी राज्‍यों में मुख्‍यमंत्रियों की तस्‍वीर वाले पोस्‍टर हटवाए हैं। ऐसा ही प्रधानमंत्री की तस्‍वीर के साथ भी किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि 4 जनवरी को चुनाव आयोग ने चुनाव तारीख के साथ आचार संहिता भी लगा दिया था।

नोटबंदी के बाद भाजपा की यहाँ पर हुई लगातार पाँचवी बड़ी जीत…

​निकाय चुनाव:- नोट बंदी के बाद से जहाँ एक तरफ विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा था कि चुनाव में भाजपा बुरी तरह हारेगी, लेकिन नतीजा इसका उल्टा ही आ रहा है। एक के बाद एक पांच जगहों पर भाजपा निकाय चुनावों में पांचवी बड़ी जीत दर्ज कर ली है।

दरअसल इस बार भाजपा ने हरियाणा में फरीदाबाद नगर निगम और भिवानी नगर परिषद के चुनावों में जोरदार जीत दर्ज की है। पार्टी ने फरीदाबाद में 40 में से 30 सीटों पर कब्‍जा जमाया। कांग्रेस यहां पर एक भी सीट नहीं जीत पाई। 10 सीटों पर निर्दलीय उम्‍मीवार विजयी रहे हैं। यहां पर पहली बार भाजपा का मेयर बनने जा रहा है। चुनाव में केंद्रीय मंत्री कृष्‍णपाल सिंह गुर्जर के बेटे भी खड़े हुए थे। उन्‍होंने नौ हजार वोट से जीत दर्ज की है। चुनावों के दौरान बसपा ने भी उम्‍मीदवार उतारे थे। पिछली बार उसके तीन पार्षद बने थे लेकिन इस बार उसे एक भी सीट नहीं मिली। चुनावों के दौरान बसपा और निर्दलीयों ने नोटबंदी का मुद्दा उठाया था। फरीदाबाद में 8 जनवरी को निकाय चुनाव हुए थे। वहीं भिवानी में भाजपा ने सिंबल दिए बिना प्रत्‍याशी मैदान में उतारे। इसके चलते उसे फायदा हुआ और उसने 31 में से 18 वार्ड जीते। कांग्रेस को केवल एक और इनेलो को दो सीटों से संतोष करना पड़ा।

 

भाजपा ने  यहां से पहले गुजरात, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान और मध्य प्रदेश में भी निकाय चुनाव फतेह किए थे। इसमें बड़ी बात यह भी है कि सभी निकाय चुनावों में भाजप की जीत का अंतर बड़ा रहा है। कांग्रेस के लिए कहीं से भी अच्‍छी खबर नहीं मिली। हालांकि यह भी एक तथ्‍य है कि जिन भी राज्‍यों में निकाय चुनाव हुए हैं वहां पर भाजपा का राज है।