भाजपा नेता का महिलाओं के प्रति बेतुका बयान…

​चुनाव:- पाँच राज्यो की विधानसभा चुनाव सर पर है ऐसे में बड़बोले बयान आना लाजिमी है, जिसमे नेता एक दूसरे पर बेतुकी टिप्पड़ी कर सुर्खियों में बने रहना चाहतें हैं।

इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद विनय कटियार ने प्रियंका गांधी पर बेतुकी टिप्पणी कर दी. उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी का स्टार प्रचारक बनने से उत्तर प्रदेश चुनाव में कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि उनसे सुंदर भी कई महिलाएं हैं जो स्टार प्रचाकर हैं. कई अभिनेत्री हैं, कलाकार हैं.

दरअसल, कांग्रेस की स्टार कैंपेनर्स की लिस्ट में प्रियंका गांधी का भी नाम शामिल है. इसपर पत्रकार ने जब उनसे राय लेनी चाही तो कटियार खूबसूरती का जिक्र करने लगे.
गौरतलब है कि विनय कटियार अभी राज्यसभा के सांसद हैं. राम मंदिर आंदोलन के दौरान वे काफी चर्चित रहे. 

बड़ी खबर:- कांग्रेस-सपा गठबंधन के बाद इस पार्टी ने भी कर लिया गठबंधन…

गठबंधन:-​उत्तर प्रदेश में मचे सियासी सरगर्मी तेज़ होती चली जा रही है इसमें चाहे नेता हो या अभिनेता सबके सब अपना बड़ा दांव खेलना चाहतें हैं।

दलों में अब राजनीतिक गठबंधन को लेकर उठापटक मची है। सोमवार को फिल्म अभिनेता से नेता बने राजपाल यादव अपने भाई राजबीर यादव की पार्टी के चुनावी गठबंधन के लिए लखनऊ स्थित लोकदल के केंद्रीय कार्यालय पहुंचे। दोनों दलों के बीच गठबंधन की बात तय हो गई है

गौरतलब है कि लोकदल के प्रदेश प्रवक्ता जयराम पांडेय ने बताया कि सर्व समभाव पार्टी (समपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिल्म अभिनेता राजपाल यादव के बड़े भाई राजबीर यादव हैं। इनकी पार्टी से लोकदल का गठबंधन हो गया है। लोकदल के साथ अपनी पार्टी का गठबंधन कर के चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह से बात के बाद गठबंधन हो गया। दोनों दल मजबूती से चुनाव लड़ेंगे।

चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुई दो अभिनेत्रीयां…

Elections:- चुनावी सरगर्मी धीरे धीरे तेज़ होने लगी है ऐसे अब बॉलीवुड सितारे भी राजनीति की और रुख अपना रहें है।

दरअसल पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनाव से पहले अब बॉलीवुड अभिनेत्री रिमी सेन और कशिश खान भाजपा में शामिल हो गई हैं। 


सूत्रों के मुताबिक दोनों मंगलवार दोपहर भाजपा कार्यालय पहुंची थी।

हो गया तय यहाँ से लड़ सकतीं है प्रियंका चुनाव…

यूपी चुनाव:- उत्तर प्रदेश चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन कराने में मुख्य भूमिका निभाने के बाद प्रियंका गांधी के आने की खबर से कांग्रेस में हलचल तेज हो गयी है। 

दरअसल कुछ नेताओं का मानना है कि जिस तरह से प्रियंका गांधी ने यूपी की स्थिति को संभाला है उससे 2019 के लोकसभा चुनावों में वे कांग्रेस का चेहरा बन सकती हैं। माना जा रहा है कि वे अपनी मां सोनिया गांधी की सीट राय बरेली से चुनाव लड़ सकती हैं। सोनिया खराब सेहत के चलते जूझ रही हैं  

  • आपको बतादें की सोनिया गांधी ने अपना पहला चुनाव 199में अमेठी से लड़ा और जीता था। 2004 में वह रायबरेली चली गईं और अमेठी से राहुल गांधी लड़ने लगे। यह दोनों सीटें गांधी परिवार का गढ़ मानी जाती हैं। मां सोनिया और भाई राहुल के चुनाव का काम प्रियंका ही देखती हैं। यहां पर चुनाव प्रचार का जिम्‍मा उनके पास ही है। कहा जा रहा है कि प्रियंका राय बरेली से ही अपनी सक्रिय राजनीति की शुरुआत कर सकती हैं। इंदिरा गांधी भी इसी सीट से चुनाव लड़ा करती थी। प्रियंका और इंदिरा की अकसर तुलना की जाती रही है।

गौरतलब है कि प्रशांत किशोर समेत सारे कांग्रेसी नेता यही चाहतें है कि प्रियंका गांधी राजनीती में अपना कदम रखें और कांग्रेस का बागडोर सम्हालें।

भाजपा नेता ने हाथ जोड़कर की अपील, नोटबंदी मोदी ने किया हमे सजा मत दो…

​चुनाव:- नोटबंदी के बाद से जनता से ज्यादा डर तो भाजपा के प्रत्याशियों को सता रहा है। जिसके वजह से वो आज हाथ जोड़कर माफ़ी मांग रहें हैं। दरअसल पंजाब, उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड,गोवा और मणिपुर में चुनाव सर पर है और ऐसे में जनता नोटबंदी से नाराज है।

इन्हीं बिच कल पंजाब के अमृतसर नार्थ विधानसभा से भाजपा मंत्री व प्रत्याशी अनिल जोशी की एक जनसभा में देखने को मिला। अनिल जोशी ने भरी जनसभा में कहा कि, जनता मुझे नोटबंदी की सजा न दे क्योंकि इसकी प्लानिंग प्रधानमंत्री मोदी की थी

 
गौरतलब है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नोटबंदी का टेस्ट माना जा रहा है। क्योंकि अभी तक लोकल बॉडी के चुनावी रिजल्ट में जनता ने भाजपा को जिताया है। लेकिन विधानसभा चुनाव काफी मायने रखने वाले हैं। जनता गुस्से में है इसको भाजपा प्रत्याशी भांप रहे हैं।

ट्विटर कंटेंट राइटर को शिवराज सिंह ने बनाया था बंधुआ मजदूर…

​सोशल मीडिया आज के दुनिया में एक ऐसा माध्यम बन चूका है जो किसी को भी हीरो बना सकता है और जीरो भी। लेकिन यहाँ पर एक ऐसा खबर आ रहा है जो एक ट्विटर कंटेंट राईटर ने अपना दर्द सुनाया।

  • दरअसल सीएम शिवराज सिंह चौहान के पूर्व ट्विटर कंटेंट राइटर ने पर्दे के पीछे की ऐसी कहानी बताई है, जो होश उड़ाने वाली है. उन्होंने अपने साथ हुए बर्ताव को बंधुआ मजदूरों के समान बताया. साथ ही आरोप लगाया कि उन्हें वेतन तक सही समय पर नहीं दिया गया और जब वेतन के साथ ही ओवरटाइम के पैसे मांगे गए तो सीएम का ट्विटर संभालने वाली कंपनी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. अब हक पाने के लिए उन्होंने मानव अधिकार आयोग का रुख किया है.

पढ़िये विश्वदीप नाग का पूरा खत…
अपने खत में उन्होंने शिवराज सिंह चौहान को संबोधित करते हुए लिखा कि, “घटना होने पर प्रदेश की जनता में भरोसा जगाने वाले आपके पर्सनल ट्वीट्स मैंने ही बनाए थे. आज आपके तंत्र में मेरा भरोसा ही डगमगा रहा है.

प्रिंट मीडिया में ढाई दशक बिताने के बाद अप्रैल 2015 में जब मुझे आपके सोशल मीडिया सेल में काम करने का ऑफर मिला तो मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा… आपने 2005 में सत्ता संभाली थी. पिछले एक दशक में मैंने संवेदनशील सरकार, कामकाज में पारदर्शिता और प्रशासन में जवाबदेही जैसे शब्द खूब सुने थे, लेकिन इसके ठीक विपरीत आपके सोशल मीडिया सेल का संचालन करने वाली कंपनी ने सारे नियम-कानूनों को हवा में उड़ा दिया है… लोग खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं. चूंकि यह प्रोजेक्ट आपका अपना है, इसलिए किसी को यह भ्रम नहीं होना चाहिए. आपके सबसे करीबी प्रोजेक्ट में इतना निरंकुश तंत्र पनप जाएगा, यह मेरी कल्पना शक्ति से परे था.”

विश्वदीप ने आगे अपने खत में खुद की नियुक्ति का उदाहरण देते हुए सीएम के नाम पर कंपनियों और अधिकारियों के बीच “मलाई खाने” की होड़ के चलते हो रही धांधली की भी पोल खोली. “गड़बड़ी की शुरुआत इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया से ही हो गई थी. जिस व्यक्ति ने कंपनी का शीर्ष अधिकारी बनकर प्रारंभिक इंटरव्यू लिया, बाद में वेतन पर बातचीत के दौरान वह यह कहकर पलट गया कि वह इस निर्णय में शामिल नहीं है. लिहाजा, उससे बात ना की जाए. मेरी प्रोफेशनल लाइफ में यह पहला मौका था, जब मुझे पता नहीं था कि मेरा चयन कौनसी कंपनी कर रही थी… मुझे समझ आया कि कंपनी ने किसी अन्य कंपनी को ठेका अपना निश्चित हिस्सा लेकर दे दिया है… मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया सेल के ठेके से दो कंपनियां मलाई खाएंगी, यह मेरे लिए थोड़े आश्चर्य का विषय था.”

  • “ आपके सोशल मीडिया सेल में मानव संसाधन का कोई मूल्य नहीं, मशीन से भी बदतर व्यवहार… कंपनियों में मुनाफा कमाने की इतनी लालसा कि 24 घंटे सोशल मीडिया सेल संचालित करने के नाम पर… दुनिया के सारे श्रम कानूनों को पैरों तले रौंद दिया गया… उच्च रक्तचाप से मेरी बाईं आंख की रौशनी आंशिक रूप से जा चुकी है. सोशल मीडिया सेल के प्रबंधक को इसकी जानकारी थी लेकिन उनके लिए मैं हाड-मांस का इंसान नहीं, बल्कि महज एक मशीन था.”
  • “… एक दिन मैं अत्यधिक बीमार था. डॉक्टर ने आराम की सलाह दी थी,लेकिन प्रबंधक मुझे आपका नाम लेकर ट्वीट्स बनाने का दबाव डाल रहे थे. मेरे जीवन को जोखिम में डाला जा रहा था. यह मुनाफा कमाने के लिए सारी मर्यादाएं तोड़ने की निकृष्ट प्रवृत्ति है. मेरे मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन. किसी भी कर्मचारी को बिना साप्ताहिक अवकाश दिए 365 दिन 24 घंटे काम करने के लिए बाध्य करना अमानवीय शोषण की श्रेणी में आता है. यह किसी को बंधुआ मजदूर बनाने के समान ही है. सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि मेरे साथ आपके सोशल मीडिया सेल में ऐसा हुआ है.”

विश्वदीप नाग का कहना है कि वो फ्रीलांसिंग से काम कर अपने परिवार का पूरा खर्चा चलाते थे, लेकिन 24 घंटे सीएम के ट्विटर को संभालने के कारण उनके हाथ से सभी अन्य काम छिन गए.
Source:- news18

तो इनके कहने से 105 सीट पर राजी हुई कांग्रेस…

गठबंधन:- ​कई दिनों तक चली मशक्कत के बाद आखिरकार समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक साथ हो ही गए। कभी हाँ कभी ना के बावजूद आखिरकार इनके बीच सहमति बनाने का काम किसने किया आइये बताते हैं।

दरअसल सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की बात का आखिरी निष्कर्ष अंतत: प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप से मुकाम तक पहुंची। बतादें ज्यादा सीटों की कांग्रेस की मांग पर सपा पीछे हटने का मन बना चुकी थी। सूत्रों के अनुसार गठबंधन के लिए सीटों के निर्धारण का फारमूला कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात में तय हुआ। प्रशांत किशोर को खुद प्रियंका गांधी से बातचीत के लिए भेजा था

आपको बतादें की कांग्रेस 130 सीट के लिये मांग कर रही थी लेकिन काफी दवाब और बातचीत के बाद 105 सीट पर अंततः राजी हुयी।

नोटबंदी का सच आया सामने हुआ इतने करोड़ का घोटाला, ये रहा सबूत…

नोटबंदी​:- 8 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार, फ़र्ज़ी नोटों जैसी सामाजिक बुराइयों के ख़ात्मे के लिए नोटबंदी की घोषणा की। लेकिन इस साहसिक कदम पर सवालिया निशान खड़ा हो रहा है।

  • दरअसल हाल में आई ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रिज़र्व बैंक के जो रिपोर्ट संसदीय समिति को सौंपा है उसमें कहा गया है कि 13 जनवरी 2017 तक रिजर्व बैंक ने 9.1 लाख रुपये मूल्य की नई करेंसी नोट जारी की मगर बाजार में उससे भी ज्यादा नए नोट चलन में आ गए। रिपोर्ट के अनुसार, उस रकम के अलावा बाज़ार में अतिरिक्त 600 अरब रुपये और आ गए हैं।

खबरों के मुताबिक PM मोदी ने सर्कुलेशन में मौजूद 177 खरब रुपए में से 154 खरब रुपए रद्द कर दिए थे। उन्होंने कहा था कि इन नोटों को नए नोटों से बदल दिया जाएगा। 9 नवंबर से 13 जनवरी के बीच आरबीआई ने 55.3 खरब रुपए के नए नोट छापे और 25 अरब 19 करोड़ 70 लाख बैंक नोट सर्कुलेशन में डाले जिनका मूल्य 67.8 खरब रुपए था। 13 जनवरी तक जनता ने 97 खरब रुपए बैंक काउंटर्स और कैश डिस्पेंशिंग मशीनों से निकाले हैं। यानी सर्कुलेशन में जारी रकम 67.8 खरब से करीब 30 खरब रुपये अतिरिक्त सर्कुलेशन में आ गए।

गौरतलब है कि तो नोटबंदी के बाद रिज़र्व बैंक ने करीब 9.1 लाख करोड़ रुपये के नए नोट जारी किये थे, लेकिन जैसे सबूत मिले हैं वो सरकार के तमाम दावों पर सावलिया निशान लगा रहे हैं।

कांग्रेस को लगा एक और बड़ा झटका, अब इस नेता ने छोड़ा पार्टी का साथ…

इलाहाबाद:- ​एक तरफ समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर अभी कुछ साफ़ नहीं हो रहा वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस को अपने ही घर में एक के बाद एक कई झटके लगते जा रहें हैं।

दरअसल इलाहाबाद मंडल के प्रभारी और पूर्व मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नंदी अपनी पत्नी शहर की मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी के कांग्रेस का हाथ छोड़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया

बता दें की नंदी ने 2007 विधानसभा चुनाव में भाजपा के ही दिग्गज नेता केशरी नाथ त्रिपाठी को शिकस्त दे कर पहली बार विधानसभा में पहुचे और बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे । और इसी शीट पर कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए रीता बहुगुणा जोशी को भी मात मिली थी ।

समाजवादी पार्टी में एक और बड़ा विस्फ़ोट, लिस्ट आते ही…

यूपी:- ​चुनावी लिस्ट आने के बाद हर एक पार्टी में जमकर विरोध सामने आ रहा है। इन्हीं में से आज समाजवादी पार्टी की लिस्ट आते ही विरोध के स्वर निकालना शुरू हो गए हैं। 

दरअसल विरोध का सबसे बड़ा धमाका किया है पूर्व केन्द्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के पुत्र राकेश वर्मा ने। समाजवादी पार्टी की लिस्ट में राकेश को बहराइच जनपद की कैसरगंज विधानसभा से टिकट दिया गया है। जबकि राकेश ने अपनी तैयारी रामनगर से होने की बात कह कर कैसरगंज से चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है


गौरतलब है समाजवादी पार्टी अभी सबसे मुश्किल वक़्त से गुजर रहा है ऐसे में लिस्ट आने के बाद ऐसे विरोध पार्टी के लिये घातक साबित हो सकतें है