राहुल गांधी के गुरूद्वारे जाने से क्या ‘सिख दंगे’ का दाग धुल जाएगा ?

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rahul gandhi in gurudwara article by aman tiwari

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दो दिन के लिए मध्य प्रदेश दौरे पर हैं जहा पर उन्होंने मंदिर, मस्जिद पर मत्था टेकने के बाद ग्वालियर के एक गुरुद्वारे पहुंचे। ये संयोग ही है कि जब भी राहुल गांधी गुरूद्वारे जाते हैं तो सिख दंगे का दाग उनका पीछा करता ही रहता है। यद्यपि राहुल गांधी नें इससे पीछा छुड़ाने के लिए सिख दंगो पर कई बार अपनी सफाई दे चुके हैं।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए थे सिख दंगे

31 अक्टूबर 1984 को तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके ही दो सुरक्षा गार्डों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। ह्त्या के 24 घंटे के भीतर पुरे भारत का इतिहास ही बदला गया। जगह-जगह पर हिंसा की ख़बरें आने लगी। हिंसा की चपेट में सबसे ज्यादा दिल्ली के आसपास इलाकों में करीब 3000 लोग मारे गए थे।

यह दाग बहुत ही गहरे हैं

यद्यपि राहुल गांधी इस बात को लेकर कितना भी इंकार कर दें लेकिन इस सच्चाई को नाकारा नहीं जा सकता। सिख दंगे के दाग से जगदीश टाइटलर और सज्जान कुमार जैसे कितने कांग्रेसी नेताओं का राजनीतिक कैरियर ही समाप्त हो गया। यही वजह है कि 21 साल बाद प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह ने संसद में माफ़ी मांगते हुए कहा था कि, ‘जो कुछ भी हुआ, उससे उनका सिर शर्म से झुक जाता है।’

कमलनाथ पर भी आरोप

वर्तमान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ पर भी सिख दंगे के आरोप लगते रहते हैं। उनपर आरोप है कि दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज में हुई हिंसा में कमलनाथ यदि वहां रक्षा करने पहुंचे थे, तो उन्होंने वहां आग की चपेट में आए सिखों की मदद क्यों नहीं की। वहां पर उनकी मौजदूगी का जिक्र पुलिस रिकॉर्ड में भी है।

दंगों की तपिश आज भी जहन में

सिख दंगे हुए लगभग तीन दशक से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन आज भी कई ऐसे सिख परिवार इस दर्दनाक घटना से उबर नहीं पाए हैं। आज भी कई ऐसे परिवार हैं जो दंगे का भयावह तस्वीर याद कर जिसमें अपनों को मरते हुए देखा था वो भुला नहीं पाते। इन दंगों में हजारों लोगों की जानें गई थी और न जाने कितने घरों को जला दिया गया था।

Post By- अमन तिवारी